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उत्तर प्रदेश में बिजली कर्मचारी हड़ताल पर क्यों हैं?

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उत्तर प्रदेश में बिजली कर्मचारी हड़ताल पर क्यों हैं?

उत्तर प्रदेश में बिजली विभाग से जुड़े कर्मचारी इन दिनों आंदोलन और हड़ताल के रास्ते पर हैं। इसके पीछे मुख्य वजह केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित इलेक्ट्रिसिटी अमेंडमेंट बिल 2025 और बिजली वितरण कंपनियों के निजीकरण की प्रक्रिया है।विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के पदाधिकारियों के अनुसार हाल ही में 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और संयुक्त किसान मोर्चा की एक संयुक्त बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में यह फैसला लिया गया कि अगर केंद्र सरकार संसद के आगामी बजट सत्र में इलेक्ट्रिसिटी अमेंडमेंट बिल 2025 को पेश या पारित करने की कोशिश करती है, तो इसका देशव्यापी विरोध किया जाएगा।संघर्ष समिति का कहना है कि इस आंदोलन में किसान, मजदूर, बिजली कर्मचारी और अभियंता मिलकर शामिल होंगे, जिनकी संख्या 25 करोड़ से अधिक हो सकती है। जरूरत पड़ने पर यह विरोध एक बड़े जन आंदोलन का रूप ले सकता है।

क्या कहा संघर्ष समिति ने?

मंगलवार देर रात हुई एक ऑनलाइन बैठक में यह तय किया गया कि बिजली के निजीकरण और इलेक्ट्रिसिटी अमेंडमेंट बिल को बिना सहमति के लागू करने की किसी भी कोशिश के खिलाफ तुरंत कड़ा कदम उठाया जाएगा। किसान और मजदूर संगठन “लाइटनिंग एक्शन” के लिए पूरी तरह तैयार रहेंगे।इस बैठक में एटक की महासचिव अमरजीत कौर, इंटक के अशोक सिंह, सीटू के नेता तपन सेन, संयुक्त किसान मोर्चा के डॉ. दर्शन पाल सहित कई प्रमुख मजदूर संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए।

427 दिनों से जारी संघर्ष

ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन और विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के संयोजक शैलेन्द्र दुबे ने बताया कि उत्तर प्रदेश के बिजली कर्मचारी पिछले 427 दिनों से लगातार निजीकरण के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं।उन्होंने साफ कहा कि यदि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण से जुड़े टेंडर जारी किए जाते हैं, तो इसके विरोध में सामूहिक जेल भरो आंदोलन शुरू किया जाएगा।संघर्ष समिति का स्पष्ट संदेश है कि बिजली क्षेत्र में निजीकरण और इलेक्ट्रिसिटी अमेंडमेंट बिल 2025 को किसी भी हालत में बिना व्यापक चर्चा और सहमति के लागू नहीं होने दिया जाएगा।

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