-टूरिज्म एक्सपो जापान का आयोजन 24 से 27 सितंबर तक
टोक्यो। राजस्थान की पहचान अब जापान में केवल किलों, महलों और रेगिस्तान तक सीमित नहीं रहेगी। राज्य ने जापान के सबसे बड़े पर्यटन आयोजनों में शामिल टूरिज्म एक्सपो जापान-2026 में इस बार वन्यजीव, हस्तशिल्प, ग्रामीण जीवन, लोक संस्कृति, खान-पान और अनुभव आधारित पर्यटन को भी प्रमुखता से पेश किया है। टोक्यो बिग साइट में गुरुवार से शुरू हुए चार दिवसीय एक्सपो में राजस्थान पर्यटन के पवेलियन का उद्घाटन जापान में भारत की राजदूत नगमा मोहम्मद मलिक ने किया।

इस अवसर पर राजस्थान पर्यटन सचिव शुचि त्यागी ने उनका स्वागत किया। भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव सुमन बिल्ला, केंद्र व राज्य सरकार के अधिकारी, भारतीय दूतावास के प्रतिनिधि तथा जापान के ट्रैवल ट्रेड और टूर ऑपरेटर्स भी मौजूद रहे।
टूरिज्म एक्सपो जापान 24 से 27 सितंबर तक आयोजित हो रहा है। इसका आयोजन जापान ट्रैवल एंड टूरिज्म एसोसिएशन, जापान एसोसिएशन ऑफ ट्रैवल एजेंट्स और जापान नेशनल टूरिज्म ऑर्गनाइजेशन की ओर से किया जा रहा है। इस वर्ष एक्सपो की थीम ‘द चेंजिंग नेचर ऑफ ट्रैवल’ है।
जयपुर से शेखावाटी तक, अलग-अलग अनुभवों पर जोरः-
राजस्थान पर्यटन विभाग के संयुक्त निदेशक (मार्केटिंग) अजय कुमार शर्मा ने बताया कि जापानी बाजार के लिए इस बार राजस्थान की प्रस्तुति को व्यापक बनाया गया है। उन्होंने कहा कि राज्य की ऐतिहासिक विरासत के साथ अब वन्यजीव, लोक कला, हस्तशिल्प, ग्रामीण जीवन, खान-पान और स्थानीय अनुभवों को भी पर्यटन उत्पाद के रूप में सामने लाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि जयपुर के साथ उदयपुर, जोधपुर, जैसलमेर, बीकानेर, रणथंभौर, भरतपुर और शेखावाटी जैसे गंतव्यों को जापानी पर्यटन बाजार से जोड़ने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य पर्यटकों को एक ही यात्रा में राजस्थान की विरासत के साथ जंगल, संस्कृति, ग्रामीण जीवन और स्थानीय अनुभवों से जोड़ना है।
शर्मा के अनुसार, जापान में राजस्थान की प्रस्तुति का फोकस अब केवल प्रमुख स्मारकों तक सीमित नहीं है। राज्य की विविधता को इस तरह सामने रखा जा रहा है कि जापानी पर्यटक अपनी रुचि के अनुसार विरासत, वन्यजीव, संस्कृति, शिल्प और ग्रामीण पर्यटन को यात्रा कार्यक्रम में शामिल कर सकें।
पवेलियन में गूंजे राजस्थानी लोकगीत, जापानी कलाकारों ने पेश किए नृत्यः-
राजस्थान पर्यटन के पवेलियन में प्रदेश की कला और संस्कृति भी आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। लोकगीतों और लोकनृत्यों की प्रस्तुतियों ने जापानी आगंतुकों को राजस्थान के सांस्कृतिक रंग से परिचित कराया। पवेलियन में जापानी कलाकारों ने कालबेलिया और चिरमी सहित राजस्थानी लोकनृत्यों की प्रस्तुतियां दीं। राजस्थानी लोकधुनों और नृत्य की प्रस्तुतियों के दौरान बड़ी संख्या में जापानी विजिटर्स पवेलियन पर जुटे। इससे राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत को जापानी दर्शकों के बीच सीधे प्रस्तुत करने का अवसर मिला।

जापानी ट्रैवल ट्रेड से सीधे संपर्कः-
एक्सपो का प्रमुख हिस्सा पर्यटन कारोबार से जुड़े प्रतिनिधियों के बीच संपर्क और व्यावसायिक संवाद है। 24 और 25 सितंबर को आयोजन के उद्योग एवं प्रेस के लिए रखे गए हैं, जबकि 26 और 27 सितंबर को आम दर्शकों के लिए आयोजन खुला रहेगा।
अजय शर्मा ने बताया कि राजस्थान की भागीदारी का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य जापानी टूर ऑपरेटर्स और ट्रैवल ट्रेड के साथ सीधे संपर्क बढ़ाना है। इसके जरिए राजस्थान के विभिन्न पर्यटन उत्पादों और नए गंतव्यों को जापानी बाजार तक पहुंचाने के अवसर तलाशे जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जापान में राजस्थान की मौजूदा प्रस्तुति राज्य की पर्यटन छवि में विस्तार का संकेत है। यहां किले और महलों के साथ जंगल, गांव, लोक कला, हस्तशिल्प, स्वाद और स्थानीय जीवन को भी राजस्थान की यात्रा का हिस्सा बनाकर प्रस्तुत किया जा रहा है। टोक्यो में राजस्थान का पवेलियन इस लिहाज से भी महत्वपूर्ण है कि यह जापानी बाजार के सामने राज्य की एक ऐसी तस्वीर रख रहा है, जिसमें राजसी विरासत के साथ प्रकृति, संस्कृति और स्थानीय जीवन भी समान रूप से दिखाई देता है।
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