मध्य पूर्व में ईरान और इजरायल के बीच जारी तनाव अब और गहरा होता जा रहा है। इस संघर्ष में अमेरिका की सक्रिय भूमिका के कारण हालात और जटिल हो गए हैं। बीते कुछ हफ्तों में लगातार नए घटनाक्रम सामने आ रहे हैं, जिससे वैश्विक चिंता बढ़ गई है।
इसी बीच, डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ा संदेश देते हुए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर इस अहम समुद्री मार्ग को बिना शर्त पूरी तरह से नहीं खोला गया, तो अमेरिका ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर कड़ी सैन्य कार्रवाई कर सकता है।ट्रंप के इस बयान के बाद ईरान की ओर से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई।
इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने स्पष्ट किया कि अगर उनके ऊर्जा या सैन्य ठिकानों पर हमला होता है, तो जवाब सिर्फ सीमित नहीं रहेगा, बल्कि अमेरिका और उसके सहयोगियों के महत्वपूर्ण ठिकानों को भी निशाना बनाया जा सकता है।वहीं, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने भी अमेरिका की धमकी को खारिज करते हुए कहा कि उनका देश किसी दबाव में नहीं आएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य सभी देशों के लिए खुला है, लेकिन उन देशों के लिए नहीं जो ईरान की संप्रभुता का उल्लंघन करते हैं।इसी दौरान एक और विवाद तब खड़ा हुआ जब ईरान ने दावा किया कि उसने अपने हवाई क्षेत्र के पास एक दुश्मन F-15 fighter jet को मार गिराया है। हालांकि, यूएस सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने इस दावे को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि उनके सभी विमान सुरक्षित हैं और ऐसा कोई नुकसान नहीं हुआ है।
इन बढ़ते तनावों का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ने लगा है। भारत में भी स्थिति को लेकर सतर्कता बढ़ा दी गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उच्चस्तरीय बैठक में कच्चे तेल, गैस, बिजली और उर्वरक जैसे क्षेत्रों पर संभावित प्रभाव की समीक्षा की। साथ ही सप्लाई चेन को सुचारु बनाए रखने के उपायों पर भी चर्चा की गई।

