नई दिल्ली। भारतीय वायु सेना (IAF) की युद्ध क्षमता को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रगति सामने आई है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, फ्रांस इस वर्ष अगस्त के मध्य तक भारत द्वारा 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के लिए भेजे गए ‘लेटर ऑफ़ रिक्वेस्ट’ (LoR) का आधिकारिक जवाब दे सकता है। फ्रांस की प्रतिक्रिया के बाद दोनों देशों के बीच सरकार-से-सरकार (G2G) समझौते पर औपचारिक वार्ता शुरू होने की संभावना है।
न्यूज़ एजेंसी ANI के अनुसार, भारत ने मई 2026 में फ्रांस को लेटर ऑफ़ रिक्वेस्ट भेजकर भारतीय वायु सेना के लिए 114 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने की प्रक्रिया शुरू की थी। फ्रांसीसी अधिकारियों ने इस प्रस्ताव का अध्ययन करने के लिए अगस्त के मध्य तक का समय मांगा है।
94 राफेल विमानों का होगा भारत में निर्माण
प्रस्तावित समझौते के तहत 114 में से 94 राफेल लड़ाकू विमानों का निर्माण भारत में किया जाएगा। इसके लिए फ्रांस की डसॉल्ट एविएशन (Dassault Aviation) किसी भारतीय कंपनी के साथ साझेदारी करेगी। इससे देश में रक्षा उत्पादन, एयरोस्पेस मैन्युफैक्चरिंग और “मेक इन इंडिया” अभियान को बड़ा प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।
IAF की घटती स्क्वाड्रन क्षमता को मिलेगा सहारा
भारतीय वायु सेना लंबे समय से अपने स्क्वाड्रन की घटती संख्या की चुनौती का सामना कर रही है। रूसी मूल के मिग लड़ाकू विमानों के विभिन्न संस्करणों के चरणबद्ध रूप से सेवा से बाहर होने और स्वदेशी एलसीए मार्क-1ए तथा एलसीए मार्क-2 के शामिल होने में हो रही देरी के कारण वायु सेना की परिचालन क्षमता प्रभावित हुई है। ऐसे में 114 नए राफेल विमानों की खरीद को रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
176 तक पहुंच सकती है भारत की राफेल ताकत
वर्तमान में भारतीय वायु सेना और भारतीय नौसेना कुल 62 राफेल लड़ाकू विमानों का ऑर्डर दे चुकी हैं। यदि 114 अतिरिक्त विमानों की यह डील अंतिम रूप लेती है तो भारत के राफेल बेड़े की संख्या बढ़कर 176 हो जाएगी।
इसके अलावा भारतीय नौसेना समुद्री अभियानों के लिए 31 और राफेल मरीन लड़ाकू विमान खरीदने की योजना पर भी आगे बढ़ रही है। ऐसे में भविष्य में भारत के पास कुल राफेल विमानों की संख्या 200 से अधिक हो सकती है।
टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और स्वदेशी हथियारों पर भी सहमति के संकेत
रक्षा मंत्रालय की ओर से भारतीय वायु सेना की युद्ध क्षमता बढ़ाने के व्यापक प्रयासों के तहत इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाया जा रहा है। वर्ष 2024 में रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह के कार्यभार संभालने के बाद मंत्रालय ने वायु सेना की परिचालन आवश्यकताओं की व्यापक समीक्षा की थी। रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) भी 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के प्रस्ताव को पहले ही मंजूरी दे चुकी है।
हाल ही में फ्रांस ने संकेत दिए थे कि वह राफेल विमानों के लिए टेक्नोलॉजी ट्रांसफर (ToT) और भारत में विकसित हथियारों एवं स्वदेशी प्रणालियों के एकीकरण को लेकर सकारात्मक रुख रखता है। फ्रांसीसी सूत्रों के अनुसार, “मेक इन इंडिया” इस संभावित रक्षा समझौते का प्रमुख आधार होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह सौदा तय होता है तो यह भारतीय वायु सेना की क्षमता में बड़ा इजाफा करने के साथ-साथ देश के रक्षा विनिर्माण क्षेत्र को भी नई गति देगा।

