नई दिल्ली। जनजातीय कार्य राज्य मंत्री दुर्गादास उइके ने लोकसभा में बताया कि जनजातीय छात्रों के लिए संचालित मैट्रिक-पूर्व और मैट्रिकोत्तर छात्रवृत्ति योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए मंत्रालय प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) जनजातीय पोर्टल का उपयोग कर रहा है। इस डिजिटल व्यवस्था से छात्रवृत्ति वितरण की निगरानी, लाभार्थियों का सत्यापन और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बढ़ी है, साथ ही शिकायतों और प्रसंस्करण समय में भी उल्लेखनीय कमी आई है।
उन्होंने बताया कि मंत्रालय राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों द्वारा उपलब्ध कराए गए लाभार्थियों के आंकड़ों के आधार पर डीबीटी जनजातीय पोर्टल के माध्यम से योजनाओं की निगरानी और एमआईएस रिपोर्ट तैयार करता है। राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों को पोर्टल पर प्रश्न, दस्तावेज, उपयोगिता प्रमाण पत्र (यूसी), व्यय विवरण (एसओई) सहित अन्य आवश्यक सूचनाएं ऑनलाइन अपलोड करने की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है, जिससे पूरी प्रक्रिया अधिक सरल और तेज हुई है।
राज्य मंत्री ने कहा कि मैट्रिक-पूर्व और मैट्रिकोत्तर छात्रवृत्ति योजनाएं केंद्र प्रायोजित योजनाएं हैं, जिनका क्रियान्वयन संबंधित राज्य और केंद्रशासित प्रदेशों के माध्यम से किया जाता है। छात्रवृत्ति का भुगतान राज्यों के अपने पोर्टलों अथवा राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल (एनएसपी) के माध्यम से किया जाता है।
उन्होंने बताया कि पोर्टल आधारित व्यवस्था के तहत एंड-टू-एंड डिजिटलीकरण लागू किया गया है, जिससे कागजी प्रक्रिया की जगह पूरी तरह डिजिटल प्रणाली ने ले ली है। साथ ही, राज्यों के पोर्टलों, राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल और मंत्रालय के डीबीटी जनजातीय पोर्टल के बीच एपीआई आधारित डेटा साझाकरण के लिए एक समान डेटा मानक विकसित किया गया है। इससे डेटा का सत्यापन और दोहराव की स्वतः जांच संभव हो सकी है।
दुर्गादास उइके ने कहा कि ऑनलाइन माध्यम से उपयोगिता प्रमाण पत्र, व्यय विवरण और अन्य दस्तावेज जमा होने से प्रशासनिक देरी में कमी आई है। इसके अतिरिक्त लाभार्थियों और लेनदेन से संबंधित आंकड़ों को मंत्रालय के प्रदर्शन डैशबोर्ड, डीबीटी मिशन, प्रयास डैशबोर्ड तथा नीति आयोग के प्रदर्शन डैशबोर्ड से जोड़ा गया है, जिससे योजनाओं की प्रगति की सार्वजनिक निगरानी भी संभव हो रही है।
उन्होंने बताया कि अनुसूचित जनजाति के विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति वितरण में राज्य स्तर पर होने वाली देरी समाप्त करने और निधियों के प्रवाह को अधिक पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से मंत्रालय ने एसएनए स्पर्श मॉडल अपनाया है। इस व्यवस्था के तहत राज्य सरकार द्वारा छात्रवृत्ति भुगतान का बिल प्रस्तुत किए जाने पर केंद्र का हिस्सा समयबद्ध तरीके से जारी किया जाता है। बिल के अनुमोदन के बाद केंद्र और राज्य दोनों की राशि डीबीटी के माध्यम से सीधे भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) से लाभार्थी छात्र के बैंक खाते में स्थानांतरित कर दी जाती है। इससे राज्य स्तर पर निधि अटकने की समस्या समाप्त होती है और छात्रवृत्ति समय पर विद्यार्थियों तक पहुंचती है।
राज्य मंत्री ने यह भी बताया कि मंत्रालय द्वारा प्रत्यक्ष रूप से संचालित केंद्रीय क्षेत्र की छात्रवृत्ति योजनाओं के लिए राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल, मंत्रालय के छात्रवृत्ति पोर्टल और सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (पीएफएमएस) के माध्यम से मजबूत डिजिटल तंत्र विकसित किया गया है। इससे आवेदन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी हुई है तथा संस्थानों, जिला और राज्य स्तर पर होने वाली मैनुअल सत्यापन प्रक्रिया में कमी आने से आवेदन निस्तारण की गति तेज हुई है।
उन्होंने कहा कि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) व्यवस्था के माध्यम से छात्रवृत्ति राशि सीधे पात्र अनुसूचित जनजाति छात्रों के बैंक खातों में भेजी जा रही है, जिससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त हुई है और यह सुनिश्चित हुआ है कि वित्तीय सहायता समय पर वास्तविक लाभार्थियों तक पहुंचे। सरकार का उद्देश्य डिजिटल तकनीक के माध्यम से जनजातीय छात्रों के लिए छात्रवृत्ति प्रणाली को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और प्रभावी बनाना है।

