नई दिल्ली। भारत के इतिहास में कारगिल विजय दिवस केवल एक सैन्य विजय का प्रतीक नहीं, बल्कि राष्ट्रभक्ति, अदम्य साहस, अटूट संकल्प और सर्वोच्च बलिदान का वह स्वर्णिम अध्याय है, जिसने पूरी दुनिया को भारतीय सैनिकों की वीरता का परिचय कराया। हर वर्ष 26 जुलाई को देश उन अमर शहीदों को श्रद्धापूर्वक नमन करता है, जिन्होंने कारगिल की दुर्गम चोटियों पर दुश्मनों को परास्त कर तिरंगे की आन, बान और शान को अक्षुण्ण रखा।
कारगिल विजय दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कारगिल युद्ध के अमर वीरों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके अद्वितीय साहस, शौर्य और बलिदान को नमन किया। उन्होंने कहा कि कारगिल की दुर्गम चोटियों पर भारतीय सैनिकों ने जिस अदम्य वीरता और अटूट संकल्प का परिचय दिया, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि कारगिल युद्ध भारतीय सेना के साहस, पराक्रम और राष्ट्रभक्ति का स्वर्णिम अध्याय है। विषम परिस्थितियों में भी भारतीय जवानों ने मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति देकर दुनिया के सामने भारतीय सेना की अदम्य शक्ति और अटूट संकल्प का परिचय दिया।
उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा और अखंडता के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले वीर सैनिकों के प्रति पूरा राष्ट्र सदैव कृतज्ञ रहेगा। उनके त्याग, समर्पण और बलिदान को भारत कभी नहीं भूल सकता।
प्रधानमंत्री ने कहा कि कारगिल के रणबांकुरों की वीरगाथा प्रत्येक भारतीय के हृदय में राष्ट्रभक्ति की भावना को और मजबूत करती है। उन्होंने देशवासियों से आह्वान किया कि वे वीर शहीदों के आदर्शों से प्रेरणा लेकर राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान दें।
उन्होंने कहा कि भारतीय सेना के जवानों की बहादुरी, अनुशासन और देश के प्रति समर्पण ही भारत की सबसे बड़ी शक्ति है। कारगिल विजय दिवस केवल एक सैन्य विजय का प्रतीक नहीं, बल्कि यह देश की एकता, संकल्प और अटूट राष्ट्रीय भावना का भी प्रतीक है।
प्रधानमंत्री मोदी ने अंत में कहा कि कारगिल के अमर वीरों का बलिदान सदैव देशवासियों को राष्ट्रसेवा, कर्तव्यनिष्ठा और देशभक्ति के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता रहेगा।
वर्ष 1999 में कारगिल युद्ध के दौरान भारतीय सेना के जांबाज़ सैनिकों ने विपरीत परिस्थितियों, कठिन मौसम और दुर्गम पहाड़ियों के बीच अद्वितीय पराक्रम का प्रदर्शन किया। सीमित संसाधनों के बावजूद उनके अदम्य साहस और अटूट संकल्प ने दुश्मन की हर साजिश को विफल कर दिया। भारतीय सैनिकों ने अपने प्राणों की आहुति देकर मातृभूमि की रक्षा की और राष्ट्र की संप्रभुता को सुरक्षित रखा।
कारगिल के रणबाँकुरों का शौर्य आज भी प्रत्येक भारतीय के हृदय में गर्व की अनुभूति कराता है। उनका बलिदान केवल एक युद्ध की विजय नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए राष्ट्रप्रेम, कर्तव्यनिष्ठा और देशभक्ति का अमर संदेश है। उन्होंने यह सिद्ध कर दिया कि जब बात राष्ट्र की सुरक्षा और सम्मान की हो, तो भारतीय सैनिक किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए सदैव तत्पर रहते हैं।
कारगिल विजय दिवस हमें यह भी याद दिलाता है कि देश की सीमाओं पर तैनात सैनिक दिन-रात अपने परिवारों से दूर रहकर राष्ट्र की सुरक्षा का दायित्व निभाते हैं। उनके त्याग, समर्पण और अनुशासन के कारण ही देशवासी सुरक्षित वातावरण में जीवन व्यतीत कर पाते हैं।
आज पूरा राष्ट्र उन सभी अमर वीरों को श्रद्धांजलि अर्पित करता है, जिन्होंने अपने सर्वोच्च बलिदान से भारत की अस्मिता की रक्षा की। उनकी वीरता की गाथाएँ सदैव देशवासियों को राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने, कर्तव्य के प्रति समर्पित रहने और मातृभूमि की सेवा के लिए प्रेरित करती रहेंगी।

