केंद्र से सकारात्मक बातचीत के बाद लिया फैसला, कहा– ‘लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई, आगे के संघर्ष के लिए जीवित रहना जरूरी’
नई दिल्ली: सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक ने 26 दिनों तक चले अपने अनशन को केंद्र सरकार की ओर से मिले लिखित आश्वासन के बाद समाप्त कर दिया। उनके इस फैसले के बाद अब आंदोलन के अगले चरण और उसके भविष्य को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है।
सूत्रों के अनुसार, 23 जुलाई की देर रात केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने सोनम वांगचुक से मुलाकात की। दोनों पक्षों के बीच कई दौर की बातचीत हुई, जिसके बाद तीन प्रमुख बिंदुओं पर सहमति बनने की बात सामने आई। इन्हीं आश्वासनों के आधार पर वांगचुक ने अपना अनशन समाप्त करने और आंदोलन को नए चरण में आगे बढ़ाने का निर्णय लिया।
अनशन समाप्त होने के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या इससे CJP आंदोलन की गति प्रभावित होगी या यह संवाद और समाधान के नए चरण में प्रवेश करेगा। फिलहाल आंदोलन से जुड़े लोग सरकार के साथ प्रस्तावित वार्ता को महत्वपूर्ण मान रहे हैं।
इस बीच जंतर-मंतर पर स्थिति पहले की तुलना में शांतिपूर्ण रही। जानकारी के अनुसार, पिछले तीन दिनों के दौरान वहां तनाव और हिंसा की घटनाएं सामने आई थीं, लेकिन शुक्रवार रात माहौल अपेक्षाकृत शांत रहा। सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच आगे की बातचीत के लिए शनिवार को निर्धारित समय पर बैठक होने की संभावना जताई गई है। दोनों पक्षों के बीच बातचीत को लेकर फिलहाल सकारात्मक माहौल बताया जा रहा है।
अनशन समाप्त करने के बाद सोनम वांगचुक ने 24 जुलाई को सोशल मीडिया पर एक वीडियो संदेश भी जारी किया। उन्होंने कहा कि सरकार ने उनकी प्रमुख मांगों पर लिखित आश्वासन दिया है, जिसके बाद उन्होंने यह निर्णय लिया। 26 दिन बाद भोजन ग्रहण करने के अनुभव को साझा करते हुए उन्होंने कहा कि भोजन का स्वाद बेहद अच्छा लगा, लेकिन भूख का अपना कोई स्वाद नहीं होता।
वांगचुक ने स्पष्ट किया कि उनका संघर्ष अभी समाप्त नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि आंदोलन के अगले चरण को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने के लिए उनका स्वस्थ और जीवित रहना आवश्यक है। उन्होंने अपने समर्थकों से शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन जारी रखने की अपील भी की।
हालांकि, सरकार की ओर से बातचीत के सकारात्मक संकेत मिलने के बावजूद अंतिम समाधान को लेकर अभी औपचारिक घोषणा का इंतजार है। आने वाले दिनों में सरकार और आंदोलनकारियों के बीच होने वाली वार्ता से इस मुद्दे की आगे की दिशा तय होने की संभावना है।

