नई दिल्ली: NEET-UG 2026 पेपर लीक विवाद को लेकर देशभर में छात्रों और अभिभावकों के बीच बढ़ते आक्रोश के बीच केंद्र सरकार ने स्थिति को शांत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है। शीर्ष सरकारी सूत्रों के अनुसार, सरकार जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों तथा 20 जुलाई को संसद भवन की ओर निकाले गए मार्च में शामिल अभ्यर्थियों के खिलाफ किसी भी प्रकार की कठोर कानूनी या दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने के पक्ष में है।
सूत्रों का कहना है कि सरकार का यह रुख इस बात का संकेत है कि वह परीक्षा प्रणाली में सामने आई कमियों को लेकर छात्रों की चिंताओं को गंभीरता से समझ रही है। सरकार टकराव की स्थिति पैदा करने के बजाय संवाद और व्यापक सुधारों के माध्यम से इस संकट का समाधान निकालना चाहती है। सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि संसद में पेपर लीक प्रकरण और परीक्षा व्यवस्था में सुधार के मुद्दे पर विस्तृत चर्चा की जाएगी।
इस बीच, सरकारी सूत्रों ने यह भी संकेत दिया है कि NEET पेपर लीक विवाद के बाद कथित रूप से आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को आर्थिक सहायता या मुआवजा देने के प्रस्ताव पर भी सकारात्मक रूप से विचार किया जा रहा है। हालांकि, इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन इसे सरकार के मानवीय दृष्टिकोण का हिस्सा माना जा रहा है।
इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देर रात जारी एक वीडियो संदेश के माध्यम से देशभर के छात्रों को संबोधित करते हुए भरोसा दिलाया कि उनके भविष्य के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार पेपर लीक की घटनाओं को अत्यंत गंभीरता से ले रही है और इस समस्या पर स्थायी रोक लगाने के लिए विशेष कानून तैयार किया जा रहा है।
प्रधानमंत्री ने बताया कि पेपर लीक रोकने के लिए तैयार किए जा रहे सख्त कानून का मसौदा शुक्रवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल के समक्ष रखा जाएगा। कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद सरकार अगले सप्ताह संसद में इस विधेयक को पेश कर पारित कराने का प्रयास करेगी।
सूत्रों के अनुसार, प्रस्तावित कानून में संगठित परीक्षा घोटालों पर कड़ी कार्रवाई, दोषियों के लिए कठोर दंड, परीक्षा एजेंसियों की जवाबदेही तय करने तथा भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने के लिए सख्त कानूनी प्रावधान शामिल किए जा सकते हैं।

