नई दिल्ली। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा है कि वर्ष 2026 से 2029 तक का समय भारत की नशे के खिलाफ लड़ाई का सबसे निर्णायक दौर होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि अगले तीन वर्षों में यह तय होगा कि देश ड्रग्स माफिया और अवैध नशीले पदार्थों के कारोबार पर निर्णायक विजय प्राप्त करेगा या यह समस्या और गंभीर रूप लेगी।
शुक्रवार को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित नारकोटिक्स कोऑर्डिनेशन सेंटर (NCORD) की 10वीं शीर्ष-स्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए गृह मंत्री ने ‘राष्ट्रीय ड्रग नियंत्रण विज़न डॉक्यूमेंट (2026–2029)’ जारी किया। यह दस्तावेज़ देश में नशीले पदार्थों की चुनौती से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए मांग में कमी (Demand Reduction), आपूर्ति में कमी (Supply Reduction) और नुकसान में कमी (Harm Reduction) पर आधारित एक समग्र राष्ट्रीय रोडमैप प्रस्तुत करता है।
ड्रग्स के खिलाफ निर्णायक रणनीति
अमित शाह ने कहा कि भारत सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में “ड्रग्स के खिलाफ जीरो टॉलरेंस” की नीति पर पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि केवल कानून लागू करने वाली एजेंसियां ही नहीं, बल्कि सभी मंत्रालयों, राज्य सरकारों और संबंधित संस्थानों को एकजुट होकर इस चुनौती का मुकाबला करना होगा।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2026 से 2029 के दौरान केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बेहतर समन्वय, आधुनिक तकनीक और प्रभावी प्रवर्तन के माध्यम से ड्रग्स नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करने का लक्ष्य रखा गया है।
NCORD बैठक में हुई व्यापक समीक्षा
गृह मंत्री की अध्यक्षता में आयोजित इस उच्चस्तरीय बैठक में देशभर में नशीले पदार्थों की तस्करी, मादक पदार्थों के दुरुपयोग तथा इनके विरुद्ध चल रहे अभियानों की व्यापक समीक्षा की गई। बैठक में विभिन्न राज्यों, केंद्रीय मंत्रालयों, प्रवर्तन एजेंसियों तथा अन्य संबंधित संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।
इस दौरान राज्यों और एजेंसियों द्वारा अब तक किए गए प्रयासों का मूल्यांकन किया गया तथा आगामी तीन वर्षों के लिए साझा रणनीति पर चर्चा की गई, ताकि ड्रग्स नियंत्रण के राष्ट्रीय लक्ष्य को और प्रभावी बनाया जा सके।
विजन डॉक्यूमेंट की प्रमुख विशेषताएं
गृह मंत्रालय (MHA) के अनुसार व्यापक विचार-विमर्श के बाद तैयार किया गया यह विज़न डॉक्यूमेंट देशभर में ड्रग्स की समस्या से निपटने के लिए स्पष्ट कार्ययोजना प्रदान करता है।
इसमें प्रमुख रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर विशेष जोर दिया गया है—
ड्रग्स की मांग और आपूर्ति दोनों में कमी लाना।
सिंथेटिक ड्रग्स और डार्कनेट के माध्यम से होने वाली तस्करी पर सख्त कार्रवाई।
नेटवर्क आधारित प्रवर्तन प्रणाली को मजबूत करना।
युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए व्यापक जनजागरूकता अभियान।
नशा पीड़ितों के उपचार एवं पुनर्वास केंद्रों की पहुंच बढ़ाना।
सभी एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय और सूचना साझाकरण।
समयबद्ध लक्ष्य, स्पष्ट जिम्मेदारियां और मापने योग्य परिणाम सुनिश्चित करना।
मंत्रालय ने बताया कि यह दस्तावेज़ प्रवर्तन, पुनर्वास, जनजागरूकता, क्षमता निर्माण और अंतर-एजेंसी समन्वय को एकीकृत करते हुए पूरे देश के लिए नीति निर्माण और प्रभावी क्रियान्वयन का मार्गदर्शक बनेगा।
NCB की वार्षिक रिपोर्ट भी होगी जारी
बैठक के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) की वार्षिक रिपोर्ट-2025 भी जारी करेंगे। इसके साथ ही जम्मू और गुवाहाटी में स्थापित एनसीबी के नए जोनल कार्यालयों का उद्घाटन भी करेंगे।
सरकार का मानना है कि नए जोनल कार्यालयों के शुरू होने से सीमावर्ती और संवेदनशील क्षेत्रों में ड्रग्स तस्करी के खिलाफ कार्रवाई और अधिक प्रभावी होगी।
ड्रग्स मुक्त भारत की दिशा में बड़ा कदम
केंद्र सरकार का कहना है कि राष्ट्रीय ड्रग नियंत्रण विज़न डॉक्यूमेंट 2026–2029 केवल एक नीति दस्तावेज़ नहीं, बल्कि “ड्रग्स मुक्त भारत” के लक्ष्य को प्राप्त करने की व्यापक कार्ययोजना है। इसके माध्यम से अगले तीन वर्षों में प्रवर्तन एजेंसियों, राज्य सरकारों और सभी हितधारकों के समन्वित प्रयासों से नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार पर निर्णायक प्रहार करने की रणनीति तैयार की गई है। सरकार को विश्वास है कि यह पहल देश के युवाओं को नशे से बचाने, संगठित अपराध पर अंकुश लगाने और एक सुरक्षित एवं स्वस्थ भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

