नॉर्वे दौरे पर पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन के बाद भारत और नॉर्डिक देशों के रिश्तों को “नेचुरल पार्टनरशिप” बताया। उन्होंने कहा कि टेक्नोलॉजी, ग्रीन एनर्जी, डिजिटल इनोवेशन और वैश्विक शांति जैसे मुद्दों पर दोनों पक्षों के बीच सहयोग तेजी से मजबूत हुआ है।
पीएम मोदी ने कहा कि पिछले एक दशक में भारत और नॉर्डिक देशों के बीच व्यापार चार गुना बढ़ा है, जबकि भारत में नॉर्डिक निवेश में करीब 200 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इससे दोनों क्षेत्रों में हजारों नई नौकरियां पैदा हुई हैं और आर्थिक सहयोग को नई मजबूती मिली है।
उन्होंने कहा कि तेजी से बढ़ते ट्रेड और इन्वेस्टमेंट ने भारत की ग्रोथ स्टोरी को गति दी है, वहीं नॉर्डिक देशों की अर्थव्यवस्थाओं को भी फायदा पहुंचाया है। इसी मजबूत आधार पर संबंधों को अगले स्तर तक ले जाने के लिए हाल के वर्षों में कई महत्वपूर्ण पहल की गई हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने भारत-यूरोपियन यूनियन फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) का जिक्र करते हुए कहा कि डेनमार्क, फिनलैंड और स्वीडन जैसे देश इसमें महत्वपूर्ण भागीदार हैं। उन्होंने कहा कि ये महत्वाकांक्षी समझौते भारत और नॉर्डिक देशों के रिश्तों में “नए स्वर्णिम युग” की शुरुआत करेंगे।
वैश्विक हालात पर बोलते हुए पीएम मोदी ने कहा कि मौजूदा तनाव और संघर्ष के दौर में भारत और नॉर्डिक देश मिलकर “रूल्स बेस्ड ग्लोबल ऑर्डर” को मजबूत करेंगे। उन्होंने कहा कि यूक्रेन और पश्चिम एशिया समेत सभी संघर्ष क्षेत्रों में भारत और नॉर्डिक देश शांति और जल्द समाधान के पक्षधर हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि सभी देशों की यह साझा राय है कि बहुपक्षीय संस्थाओं (मल्टीलेटरल इंस्टिट्यूशंस) में सुधार अब आवश्यक ही नहीं बल्कि अत्यंत जरूरी हो चुका है।
आतंकवाद के मुद्दे पर पीएम मोदी ने सख्त संदेश देते हुए कहा,
“टेररिज्म पर हमारा क्लियर और यूनाइटेड स्टैंड है। नो कॉम्प्रोमाइज, नो डबल स्टैंडर्ड्स।”
उन्होंने ग्रीन टेक्नोलॉजी और सस्टेनेबिलिटी के क्षेत्र में सहयोग को भविष्य की बड़ी ताकत बताया। पीएम मोदी ने कहा कि आइसलैंड की जियोथर्मल और फिशरीज विशेषज्ञता, नॉर्वे की ब्लू इकोनॉमी और आर्कटिक अनुभव, तथा नॉर्डिक देशों की मैरीटाइम और सस्टेनेबिलिटी क्षमताओं को भारत के बड़े पैमाने और संभावनाओं के साथ जोड़कर दुनिया के लिए बेहतर भविष्य तैयार किया जाएगा।
इसके साथ ही उन्होंने कहा कि स्वीडन की एडवांस मैन्युफैक्चरिंग और डिफेंस टेक्नोलॉजी, फिनलैंड की टेलीकॉम और डिजिटल विशेषज्ञता तथा डेनमार्क की साइबर सिक्योरिटी और हेल्थकेयर क्षमता को भारत के प्रतिभाशाली मानव संसाधन के साथ जोड़कर वैश्विक स्तर पर भरोसेमंद समाधान विकसित किए जाएंगे।

