बंगाल में बड़ा प्रशासनिक बदलाव: CM शुभेंदु अधिकारी ने भंग किया ‘पुलिस कल्याण बोर्ड’
कोलकाता। पश्चिम बंगाल के नए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सत्ता संभालने के महज सात दिनों के भीतर कई बड़े प्रशासनिक फैसले लेकर राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। शनिवार को उन्होंने ममता बनर्जी सरकार के दौरान बनाए गए ‘पुलिस कल्याण बोर्ड’ को तत्काल प्रभाव से भंग करने की घोषणा कर दी।
मुख्यमंत्री ने पुलिस प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ हुई बैठक में कहा कि यह बोर्ड अपने मूल उद्देश्य से भटक गया था और धीरे-धीरे एक राजनीतिक दल के अंग की तरह काम करने लगा था। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अब राज्य में “शासक का कानून” नहीं बल्कि “कानून का राज” चलेगा।
“अच्छे उद्देश्य से बना था बोर्ड, लेकिन…”
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि पुलिस कल्याण बोर्ड की स्थापना पुलिसकर्मियों के हित और उनके कल्याण के लिए की गई थी। लेकिन समय के साथ इसकी कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे। उन्होंने आरोप लगाया कि आम पुलिसकर्मियों को अपेक्षित लाभ नहीं मिला, जबकि कुछ चुनिंदा अधिकारियों को विशेष सुविधाएं दी जाती रहीं।
उन्होंने कहा कि शांतनु सिन्हा बिस्वास और बिजितेश्वर राउत जैसे कुछ अधिकारियों को इस व्यवस्था का विशेष लाभ मिला। इसी कारण सरकार ने बोर्ड को समाप्त करने का फैसला लिया है।
पुलिस सुधार के लिए हाई-लेवल कमेटी
मुख्यमंत्री ने पुलिस व्यवस्था में व्यापक सुधार के संकेत देते हुए तीन महीने के भीतर नया ढांचा तैयार करने हेतु हाई-लेवल कमेटी का गठन किया यह समिति पुलिस प्रशासन में पारदर्शिता, जवाबदेही और आम जनता के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाने के सुझाव देगी।
सरकार का कहना है कि नई व्यवस्था में पुलिसकर्मियों के वास्तविक कल्याण और उनकी कार्यक्षमता सुधारने पर जोर दिया जाएगा।
अवैध वसूली पर सख्ती
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने टोटो, ऑटो चालकों और फेरीवालों से होने वाली कथित अवैध वसूली पर भी कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश दिए कि आम लोगों से जबरन वसूली करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
उन्होंने कहा कि गरीब मेहनतकश लोगों को डराकर पैसे वसूलने की संस्कृति अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
आम नागरिकों को दी बड़ी राहत
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यदि किसी नागरिक को पुलिस द्वारा परेशान किया जाता है, तो वह सीधे संबंधित पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज करा सकता है। उन्होंने कहा कि कानून सबके लिए बराबर है और किसी भी व्यक्ति को राजनीतिक प्रभाव या पद के आधार पर विशेष संरक्षण नहीं मिलेगा।
सात दिन में सात बड़े फैसलों से बढ़ी सियासी हलचल
9 मई को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद से शुभेंदु अधिकारी लगातार तेज फैसले ले रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उनके इन कदमों का उद्देश्य प्रशासनिक ढांचे में बदलाव और कानून-व्यवस्था पर मजबूत पकड़ बनाना है। वहीं विपक्ष इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बता रहा है।

