चेन्नई। तमिलनाडु की राजनीति में बीजेपी नेता के. अन्नामलाई का प्रभाव लगातार बढ़ता नजर आ रहा है। डीएमके नेता उदयनिधि स्टालिन के सनातन धर्म पर दिए गए विवादित बयान के बाद जिस तरह से अन्नामलाई ने आक्रामक रुख अपनाया, उसने उन्हें राज्य में बीजेपी के सबसे मुखर और फायरब्रांड चेहरे के रूप में स्थापित कर दिया है। अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है कि पार्टी नेतृत्व जल्द ही उन्हें बड़ी जिम्मेदारी सौंप सकता है।
तमिलनाडु में टीवीके की बढ़ती सक्रियता, अभिनेता थलपति विजय के राजनीति में प्रभाव और डीएमके के खिलाफ तेज होती राजनीतिक बयानबाजी के बीच अन्नामलाई लगातार बीजेपी का पक्ष मजबूती से रखते दिखाई दिए। खासतौर पर सनातन धर्म विवाद में उन्होंने उदयनिधि स्टालिन पर खुलकर हमला बोला और डीएमके सरकार को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
अन्नामलाई के लगातार हमलों और बढ़ते राजनीतिक दबाव के बाद उदयनिधि स्टालिन को सफाई देनी पड़ी। उन्होंने कहा कि उनका मकसद किसी धर्म या आस्था का अपमान करना नहीं था, बल्कि वे सामाजिक असमानता और जातिगत भेदभाव के खिलाफ बोल रहे थे।
बीजेपी सूत्रों के अनुसार पार्टी नेतृत्व तमिलनाडु में अन्नामलाई की लोकप्रियता और आक्रामक राजनीतिक शैली से काफी प्रभावित है। माना जा रहा है कि दक्षिण भारत में पार्टी को मजबूत करने की रणनीति के तहत उन्हें संगठन या राष्ट्रीय राजनीति में बड़ी भूमिका दी जा सकती है।

आईपीएस से राजनीति तक का सफर
4 जून 1984 को तमिलनाडु के करूर जिले के एक किसान परिवार में जन्मे के. अन्नामलाई ने कोयंबटूर के पीएसजी कॉलेज ऑफ टेक्नोलॉजी से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने आईआईएम लखनऊ से एमबीए किया और यूपीएससी परीक्षा पास कर आईपीएस अधिकारी बने।
कर्नाटक कैडर के अधिकारी के रूप में उन्होंने उडुपी, चिकमगलूर और बेंगलुरु में कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया। अपनी सख्त और तेजतर्रार कार्यशैली के कारण वे “सिंघम” छवि वाले अधिकारी के रूप में चर्चित हुए। बाद में उन्होंने बीजेपी का दामन थाम लिया।
राजनीति में आने के बाद अन्नामलाई ने तेजी से अपनी पहचान बनाई। प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष बनने के बाद उन्होंने तमिलनाडु में पार्टी को मजबूत करने के लिए कई जनसंपर्क अभियान और यात्राएं निकालीं। युवाओं और हिंदुत्व समर्थक वर्ग के बीच उनकी लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में अन्नामलाई बीजेपी के दक्षिण भारत अभियान का बड़ा चेहरा बन सकते हैं।

