लखनऊ: उत्तर प्रदेश में स्मार्ट मीटर को लेकर बढ़ती शिकायतों के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सख्त रुख अपनाया है। उपभोक्ताओं द्वारा बिजली बिल में गड़बड़ी की शिकायतों के बाद सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए प्रीपेड स्मार्ट मीटर की अनिवार्यता समाप्त कर दी है।
अब राज्य में लगाए गए प्रीपेड स्मार्ट मीटरों को पोस्टपेड स्मार्ट मीटर में बदला जा रहा है। इसके साथ ही पहले की तरह बिजली बिल में भुगतान की अंतिम तिथि भी दर्ज रहेगी, जिससे उपभोक्ताओं को सुविधा मिल सके।
24 घंटे में मांगा गया जवाब
स्मार्ट मीटर को लेकर उठे सवालों पर उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन को 24 घंटे के भीतर जवाब देने का निर्देश दिया है। आयोग ने पहले भी 10 दिन का समय दिया था, लेकिन तय अवधि बीत जाने के बावजूद कोई जवाब नहीं दिया गया।
देर पर आयोग सख्त
करीब 20 दिन बीत जाने के बाद भी जवाब न मिलने से आयोग ने नाराजगी जताई है। अब स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि 24 घंटे के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
सरकार का कहना है कि उपभोक्ताओं की समस्याओं का समाधान प्राथमिकता है और किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।


