फ्रांस के राष्ट्रपति Emmanuel Macron के हालिया भारत दौरे के बाद भारत में राफेल लड़ाकू विमान निर्माण को लेकर प्रक्रिया तेज हो गई है। रक्षा मंत्रालय इस प्रस्ताव को जल्द ही कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी के पास भेजने की तैयारी में है। माना जा रहा है कि अगले कुछ महीनों में इस पर औपचारिक समझौता हो सकता है।
इससे पहले रक्षा मंत्रालय की डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल ने भारतीय वायुसेना के लिए 114 राफेल विमानों को भारत में बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। राफेल विमान फ्रांस की कंपनी Dassault Aviation बनाती है। योजना के तहत दासो किसी भारतीय साझेदार कंपनी के साथ मिलकर भारत में उत्पादन इकाई स्थापित कर सकती है। इससे तकनीक हस्तांतरण, स्थानीय रोजगार और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
क्या भारत इन राफेल विमानों को निर्यात कर सकेगा?
मुख्य सवाल यही है कि भारत में बनने वाले राफेल विमानों को क्या दूसरे देशों को बेचा जा सकेगा? उपलब्ध जानकारी के अनुसार, प्रस्तावित 114 विमान भारतीय वायुसेना की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाए जा रहे हैं। इनका प्राथमिक उद्देश्य देश की वायु रक्षा क्षमता को मजबूत करना है, न कि निर्यात।
यह उत्पादन लाइसेंस और तकनीकी समझौते के तहत होगा। ऐसे में बिना फ्रांसीसी कंपनी और फ्रांस सरकार की अनुमति के भारत इन विमानों को किसी तीसरे देश को नहीं बेच सकता। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में यदि निर्यात का विकल्प खुलता भी है, तो इसके लिए अलग से समझौता और दोनों देशों की संयुक्त सहमति आवश्यक होगी।संक्षेप में, फिलहाल भारत में बनने वाले राफेल विमानों का उपयोग भारतीय वायुसेना तक ही सीमित रहने की संभावना है, और निर्यात का निर्णय पूरी तरह द्विपक्षीय समझौते पर निर्भर करेगा।

