आने वाले समय में अमेरिका कनाडा के टुकड़े कर सकता है! कनाडा और अमेरिका के बीच कूटनीतिक बयानबाज़ी उस समय तेज हो गई जब यह रिपोर्ट सामने आई कि कनाडा के अल्बर्टा प्रांत के कुछ अलगाववादी नेताओं ने हाल के महीनों में अमेरिकी अधिकारियों से मुलाकात की है। इस मुद्दे पर कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने सख्त प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि किसी भी बाहरी दखल को स्वीकार नहीं किया जाएगा और देश की संप्रभुता सर्वोपरि है।ओटावा में प्रांतीय प्रीमियरों के साथ बैठक के बाद कार्नी ने कहा कि उन्होंने अमेरिकी नेतृत्व के साथ हर बातचीत में कनाडा की एकता और स्वतंत्रता को लेकर अपना रुख स्पष्ट रखा है। उनके अनुसार, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ हुई चर्चाओं में अल्बर्टा की अलग पहचान या स्वतंत्रता का मुद्दा कभी औपचारिक रूप से नहीं उठाया गया।
कब बढ़ा विवाद?
यह विवाद तब और बढ़ा जब ब्रिटिश कोलंबिया के प्रीमियर डेविड एबे ने आरोप लगाया कि अल्बर्टा से जुड़े कुछ अलगाववादी समूह अमेरिकी प्रशासन से संपर्क में रहे हैं, जिसे उन्होंने गंभीर मामला बताया। अल्बर्टा कनाडा का प्रमुख ऊर्जा उत्पादक क्षेत्र है और वहां समय-समय पर अधिक स्वायत्तता या अलगाव की मांग उठती रही है।रिपोर्टों के अनुसार, संबंधित समूहों ने वॉशिंगटन में कई बार मुलाकातें कीं, हालांकि अमेरिकी पक्ष ने कहा है कि विभिन्न सामाजिक और नीति समूहों से मिलना सामान्य प्रक्रिया है और इससे किसी प्रकार का राजनीतिक समर्थन नहीं जोड़ा जाना चाहिए।गौरतलब है कि पहले भी ट्रंप द्वारा कनाडा को अमेरिका का “51वां राज्य” बनाने जैसी टिप्पणी चर्चा में रही थी, जिस पर कनाडा सरकार ने कड़ा विरोध जताया था। मौजूदा घटनाक्रम के बाद दोनों देशों के रिश्तों और आंतरिक राजनीति पर नजर रखी जा रही है।

