केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के बीच आठवें वेतन आयोग को लेकर हलचल तेज हो गई है। 25 फरवरी 2026 को नई दिल्ली में नेशनल काउंसिल (स्टाफ साइड) और जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM) की बैठक आयोजित की गई, जिसमें कर्मचारियों से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई।
क्या हुई चर्चा?
बैठक में परिवार इकाई (फैमिली यूनिट) की परिभाषा को तीन से बढ़ाकर पांच सदस्यों तक करने, कर्मचारियों को सेवा अवधि में कम से कम पांच पदोन्नति (प्रमोशन) की गारंटी देने, वार्षिक वेतन वृद्धि (इंक्रीमेंट) बढ़ाने और आठवें वेतन आयोग के तहत पुरानी पेंशन योजना (OPS) को फिर से लागू करने जैसे प्रस्तावों पर विचार-विमर्श किया गया। इसके अलावा वेतन आयोग से जुड़े 18 बिंदुओं पर जवाब तैयार करने, गैर-CGHS शहरों में सीजीएचएस शुल्क में संशोधन, और इंटरनेट जैसी आवश्यक सेवाओं के लिए भत्ता देने जैसे मुद्दे भी चर्चा में शामिल रहे।
इस बैठक में रक्षा, रेलवे, डाक विभाग, आयकर विभाग, लेखा एवं ऑडिट समेत कई केंद्रीय कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। कर्मचारी संगठनों ने न्यूनतम मूल वेतन, प्रमोशन नीति और वार्षिक इंक्रीमेंट जैसे विषयों पर साझा रुख तैयार करने की कोशिश की। बताया जा रहा है कि अगले 10 से 15 दिनों में विभिन्न कर्मचारी संगठन अपनी मांगें JCM को सौंपेंगे, जिसके आधार पर एक साझा ज्ञापन (कॉमन मेमोरेंडम) तैयार किया जाएगा।जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी केंद्र सरकार और कर्मचारियों के बीच संवाद का आधिकारिक मंच है। इसलिए आठवें वेतन आयोग से जुड़ी सिफारिशों को अंतिम रूप देने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका मानी जा रही है।
कर्मचारी पक्ष का कहना है कि कॉमन मेमोरेंडम तैयार होने के बाद इसे वेतन आयोग की अध्यक्ष को सौंपा जाएगा। 10 मार्च को इस मसौदे पर आगे चर्चा के लिए एक और बैठक प्रस्तावित है, जिसके बाद इसे औपचारिक रूप से आयोग को भेजा जा सकता है।फिलहाल न्यूनतम वेतन, फिटमेंट फैक्टर और पेंशन से जुड़े मुद्दे कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में शामिल हैं। अब सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार आठवें वेतन आयोग को लेकर क्या फैसला लेती है और कर्मचारियों को किस तरह की राहत मिलती है।

