पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच बढ़ता तनाव एक बार फिर गंभीर टकराव में बदलता नजर आ रहा है। हाल ही में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने रावलपिंडी स्थित सेना मुख्यालय का दौरा कर सीमा पर चल रही झड़पों की स्थिति की समीक्षा की।
प्रधानमंत्री कार्यालय के बयान के अनुसार, उन्हें सैन्य नेतृत्व ने मौजूदा हालात और कार्रवाई की विस्तृत जानकारी दी।बताया गया कि शरीफ़ ने सीमा क्षेत्रों में तैनात पाकिस्तानी सेना की कार्रवाई और पेशेवर रवैये की सराहना की। दूसरी ओर, पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा मोहम्मद आसिफ ने कहा कि अफगानिस्तान के साथ स्थिति “खुली लड़ाई” जैसी हो चुकी है। उनका कहना है कि कतर की मध्यस्थता से अक्टूबर में हुए युद्धविराम के बाद यह अब तक का सबसे गंभीर संघर्ष है।
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के संबंध 1947 में पाकिस्तान के गठन के बाद से ही जटिल रहे हैं। दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और जातीय संबंध होने के बावजूद सीमा विवाद, आतंकी गतिविधियों और आपसी आरोप-प्रत्यारोप के कारण रिश्तों में बार-बार तनाव आया है। पिछले कुछ महीनों में सीमा पर कई छोटी झड़पें हुईं, लेकिन हालिया संघर्ष को अधिक खतरनाक माना जा रहा है।सरकारी बयान के मुताबिक, प्रधानमंत्री को 27 फरवरी को सैन्य नेतृत्व ने सीमा पर बढ़ते तनाव और अभियानों की विस्तृत जानकारी दी। बयान में ‘फितना अल-खवारिज’ कहे जाने वाले तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) और अफगान तालिबान शासन के बीच कथित सहयोग पर भी चिंता जताई गई।
पाकिस्तान की ओर से दावा किया गया है कि सेना ने काबुल और कंधार जैसे क्षेत्रों में लक्षित हवाई हमले कर आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया।हालांकि तालिबान की ओर से बातचीत की इच्छा जताए जाने की खबरें भी सामने आई हैं, लेकिन पाकिस्तान ने इसे अपनी सुरक्षा के खिलाफ कार्रवाई करार देते हुए सेना को सख्त जवाब देने की छूट दी है।विशेषज्ञों का मानना है कि सीमा पर स्थायी शांति तभी संभव है जब दोनों देश आपसी संवाद, विश्वास बहाली और आतंकवाद पर साझा रणनीति के रास्ते पर आगे बढ़ें। फिलहाल हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं और क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर चिंता जारी है।

