अमेरिका में टैरिफ को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा देश-विशिष्ट शुल्क को अवैध ठहराए जाने के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सभी देशों पर 15 प्रतिशत समान ग्लोबल टैरिफ लगाने की घोषणा की है। हालांकि, इस संबंध में अभी तक औपचारिक अधिसूचना जारी नहीं हुई है।
क्या है पूरा मामला?
सुप्रीम कोर्ट ऑफ यूनाइटेड स्टेट ने हाल ही में ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए कुछ देश-विशिष्ट टैरिफ पर आपत्ति जताई। इसके बाद Donald Trump ने पहले 150 दिनों के लिए 10 प्रतिशत समान टैरिफ लगाने का ऐलान किया, जिसे बाद में बढ़ाकर 15 प्रतिशत करने की बात कही गई।
किन देशों पर होगा असर?
मूडीज एनालिटिक्स के मुताबिक, 15 फीसदी का एक समान शुल्क एशिया-प्रशांत क्षेत्र की उन अर्थव्यवस्थाओं को कुछ राहत दे सकता है, जिन्हें पहले अधिक दरों का सामना करना पड़ रहा था। इनमें China, Japan, South Korea और Taiwan जैसे देश शामिल हैं।विशेषज्ञों का कहना है कि हालांकि समान दर कुछ देशों के लिए राहत हो सकती है, लेकिन कुल मिलाकर वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता बनी रहेगी।
भारत और इंडोनेशिया पर प्रभाव
रिपोर्ट में कहा गया है कि कोर्ट के फैसले से अमेरिका की देश-विशिष्ट टैरिफ लगाने की शक्ति सीमित होती है, जिससे व्यापार वार्ताओं में उसका दबाव घट सकता है। इसका असर India और Indonesia के साथ हालिया व्यापार समझौतों पर भी पड़ सकता है।भारत द्वारा रूसी तेल आयात में कटौती की समयसीमा और इंडोनेशिया से ड्यूटी-फ्री टेक्सटाइल निर्यात की शर्तें अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हैं। खबर है कि भारत ने वॉशिंगटन भेजे जाने वाले अपने प्रतिनिधिमंडल की योजना भी फिलहाल टाल दी है।
आगे क्या हो सकता है?
मूडीज का मानना है कि ट्रंप प्रशासन टैरिफ बढ़ाने के लिए अन्य कानूनी रास्ते तलाश सकता है। यदि ऐसा होता है तो अमेरिकी आयात शुल्क पहले के स्तर के करीब पहुंच सकते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार
कंपनियां पहले से चुकाए गए टैरिफ पर मुआवजे की मांग कर सकती हैं।आयातक संभावित बढ़ोतरी से पहले तेजी से माल मंगाने की कोशिश कर सकते हैं।व्यापार समझौतों की मंजूरी की प्रक्रिया कुछ देशों में धीमी पड़ सकती है।भले ही टैरिफ दरें पहले से कम स्तर पर स्थिर हो जाएं, लेकिन वैश्विक सप्लाई चेन और लॉजिस्टिक्स में अनिश्चितता बनी रहने की आशंका जताई जा रही है।
कुल मिलाकर, 15 प्रतिशत ग्लोबल टैरिफ का फैसला अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए राहत और जोखिम—दोनों पहलू लेकर आ सकता है, और आने वाले महीनों में इसका वास्तविक प्रभाव अधिक स्पष्ट होगा।

