Sunday, February 8, 2026
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अमेरिका और ईरान के बीच टकराव की जड़ क्या है?

मध्य पूर्व में एक बार फिर हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती तनातनी को देखते हुए यह सवाल स्वाभाविक है कि आखिर वॉशिंगटन ईरान को लेकर इतना आक्रामक रुख क्यों अपनाए हुए है। इस समय ओमान की राजधानी मस्कट में दोनों देशों के बीच टकराव टालने के लिए बातचीत जारी है, लेकिन समाधान अभी दूर नजर आता है।

परमाणु कार्यक्रम बना सबसे बड़ा विवाद

असल विवाद ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर है। अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के मुताबिक, ईरान के पास फिलहाल कोई परमाणु हथियार नहीं है, लेकिन वह यूरेनियम संवर्धन को लगभग 60 प्रतिशत तक पहुंचा चुका है। अमेरिका और इजरायल का मानना है कि यह स्तर परमाणु हथियार बनाने की दिशा में एक खतरनाक कदम हो सकता है।ईरान बार-बार यह दावा करता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है, लेकिन पश्चिमी देशों को उसके इरादों पर भरोसा नहीं है।इजरायल की सुरक्षा को लेकर अमेरिका की चिंताअमेरिका की सबसे बड़ी चिंता अपने करीबी सहयोगी इजरायल को लेकर है। कई रणनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि यदि ईरान भविष्य में परमाणु हथियार हासिल कर लेता है, तो इससे इजरायल के अस्तित्व पर सीधा खतरा पैदा हो सकता है। इसी डर के चलते इजरायल ने जून 2025 में ईरान के परमाणु और सैन्य ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हमले किए थे।हालांकि कुछ विश्लेषकों का यह भी मानना है कि यदि ईरान इजरायल पर परमाणु हमला करता है, तो उसे भारी जवाबी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा, क्योंकि इजरायल के पास भी परमाणु हथियार मौजूद माने जाते हैं। यही वजह है कि गलत आकलन की स्थिति में परमाणु संघर्ष का खतरा बना रहता है।

क्षेत्रीय अस्थिरता का डर

ईरान के परमाणु हथियार हासिल करने की आशंका सिर्फ इजरायल तक सीमित नहीं है। अमेरिका को यह भी डर है कि इससे सऊदी अरब समेत अन्य क्षेत्रीय देश भी अपने परमाणु कार्यक्रम शुरू कर सकते हैं, जिससे पूरा मध्य पूर्व अस्थिरता की चपेट में आ सकता है।2015 में हुए ईरान परमाणु समझौते से पहले ट्रंप प्रशासन ने अमेरिका को बाहर निकाल लिया था और ईरान पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए थे। अब ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में वर्षों बाद ईरान से दोबारा बातचीत की पहल जरूर हुई है, लेकिन अब तक कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया है।यूरेनियम संवर्धन को लेकर दोनों पक्षों के बीच सहमति बनना अभी भी मुश्किल दिख रहा है। जून 2025 में संयुक्त राष्ट्र की परमाणु एजेंसी IAEA ने भी यह कहा कि ईरान अपने परमाणु दायित्वों का पूरी तरह पालन नहीं कर रहा है।अक्टूबर 2024 में इजरायल ने ईरान पर अब तक का सबसे बड़ा सीधा हमला किया था। इस कार्रवाई में ईरान की हवाई रक्षा प्रणाली और मिसाइल उत्पादन से जुड़ी इकाइयों को निशाना बनाया गया। कुछ रिपोर्टों के अनुसार, तेहरान के पास स्थित परचिन सैन्य परिसर में एक संदिग्ध इमारत भी नष्ट की गई, जहां गुप्त परमाणु शोध होने की आशंका जताई गई थी।यह हमला ईरान द्वारा पहले किए गए बैलिस्टिक मिसाइल हमले के जवाब में बताया गया।हालांकि ईरान के पास फिलहाल परमाणु हथियार नहीं हैं, लेकिन पश्चिमी देशों का मानना है कि उसके पास आवश्यक तकनीकी ज्ञान और ढांचा मौजूद है, जिससे वह कम समय में यह क्षमता हासिल कर सकता है। यही आशंका अमेरिका और इजरायल को लगातार सख्त रुख अपनाने पर मजबूर कर रही है।जब तक कूटनीतिक स्तर पर ठोस समझौता नहीं होता, तब तक यह टकराव मध्य पूर्व की शांति के लिए एक बड़ी चुनौती बना रहेगा।

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