लोकसभा में बजट पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भारत-अमेरिका के अंतरिम व्यापार समझौते को लेकर सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि इस समझौते के जरिए देश के हितों से समझौता किया गया है और इसे “थोक स्तर पर आत्मसमर्पण” बताया। राहुल गांधी ने दावा किया कि यह डील देश की ऊर्जा सुरक्षा, डेटा नीति और आर्थिक संप्रभुता पर असर डाल सकती है।
क्या बोले राहुल?
राहुल गांधी ने यह भी कहा कि समझौते के बाद भारत की ऊर्जा आपूर्ति जैसे महत्वपूर्ण निर्णयों पर बाहरी प्रभाव बढ़ सकता है। उनके मुताबिक डेटा लोकलाइजेशन, डिजिटल टैक्स और विदेशी कंपनियों को दी गई संभावित रियायतों जैसे मुद्दों पर सरकार को स्पष्ट जवाब देना चाहिए।इन आरोपों पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कड़ा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि विपक्ष के आरोप निराधार हैं और वर्तमान सरकार देशहित में फैसले ले रही है। सीतारमण ने पलटवार करते हुए पूर्ववर्ती यूपीए सरकार के फैसलों पर सवाल उठाए और कहा कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर लिए गए कुछ पुराने निर्णयों ने भारत की स्थिति को कमजोर किया था।
वित्त मंत्री ने 2009 में मिस्र के शर्म अल-शेख में हुई बैठक का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय की परिस्थितियों में लिए गए कदमों पर भी चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने विश्व व्यापार संगठन (WTO) की 2013 की बाली बैठक का उदाहरण देते हुए दावा किया कि उस दौर में हुए समझौतों से किसानों और गरीबों के हित प्रभावित हुए थे।सरकार और विपक्ष के बीच यह टकराव भारत-अमेरिका व्यापार समझौते और उससे जुड़े आर्थिक, रणनीतिक और डिजिटल नीतियों के मुद्दों पर आगे भी जारी रहने के संकेत देता है। दोनों पक्ष अपने-अपने तर्कों के साथ देशहित की बात कर रहे हैं, जबकि अंतिम मूल्यांकन नीति के क्रियान्वयन और उसके प्रभाव पर निर्भर करेगा।

