महाराष्ट्र में नशे के बढ़ते मामलों को रोकने के लिए राज्य सरकार ने सख्त कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विधानसभा में जानकारी दी कि पूरे राज्य में नशीले पदार्थों की रोकथाम के लिए एक विशेष टास्क फोर्स बनाई गई है।
यह मुद्दा प्रवीण दटके द्वारा उठाए जाने के बाद सामने आया, जिस पर सरकार ने बताया कि ड्रग्स का नेटवर्क सिर्फ राज्य तक सीमित नहीं है, बल्कि दूसरे राज्यों और विदेशों तक फैला हुआ है। सरकार के अनुसार, इन गतिविधियों में कई बार नाबालिगों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है।इसी को देखते हुए राज्य सरकार ने एक अहम प्रस्ताव केंद्र को भेजा है, जिसमें गंभीर अपराधों में आरोपी घोषित करने की उम्र सीमा 18 साल से घटाकर 16 साल करने की बात कही गई है।
सरकार ने साफ किया है कि अगर किसी पुलिस अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही या संलिप्तता पाई जाती है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, जिसमें नौकरी से बर्खास्तगी भी शामिल है। साथ ही पुलिस, प्रशासन और खुफिया एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
विदेशी नागरिकों की बढ़ती भागीदारी को ध्यान में रखते हुए उनकी गतिविधियों पर भी नजर रखने की योजना बनाई गई है। इसके तहत उनके वीजा और पासपोर्ट की नियमित जांच और एक अलग डेटाबेस तैयार करने का प्रस्ताव है।इसके अलावा, बड़े शहरों में होटल, लॉज, किराए के मकान और संवेदनशील इलाकों में जांच बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। बार और पब पर भी सख्ती की जाएगी—नियमों का बार-बार उल्लंघन करने वालों का लाइसेंस रद्द किया जा सकता है। साथ ही CCTV निगरानी, रिकॉर्ड जांच और अचानक निरीक्षण को भी बढ़ाया जाएगा।

