दिल्ली और एनसीआर क्षेत्र में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, लेकिन चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर उसी गति से विकसित नहीं हो पा रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, मौजूदा चार्जिंग सुविधाएं अनुमानित जरूरत से काफी कम हैं, जिससे भविष्य में EV उपयोगकर्ताओं को दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।
राजधानी में क्या है हाल?
राजधानी में फिलहाल लगभग 8,998 सार्वजनिक EV चार्जिंग प्वाइंट्स संचालित हैं, जबकि अनुमानित आवश्यकता करीब 36,177 प्वाइंट्स की बताई जा रही है। यानी जरूरत और उपलब्धता के बीच 27 हजार से अधिक प्वाइंट्स का अंतर है। यह दर्शाता है कि इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती मांग के मुकाबले चार्जिंग ढांचा अभी पर्याप्त नहीं है।दिल्ली सरकार ने वर्ष के अंत तक चार्जिंग प्वाइंट्स की संख्या बढ़ाकर 16,070 करने का लक्ष्य तय किया है। इस लक्ष्य के तहत करीब 7,000 नए प्वाइंट्स स्थापित किए जाने की योजना है, जिनमें से अधिकतर परिवहन विभाग की निगरानी में लगाए जाएंगे। आनंद विहार और न्यू अशोक नगर RRTS स्टेशनों पर छह-छह नए चार्जिंग प्वाइंट लगाने की योजना है, जबकि दिल्ली मेट्रो परिसरों में 66 अतिरिक्त यूनिट्स स्थापित की जाएंगी। हालांकि लक्ष्य पूरा होने के बाद भी मांग और आपूर्ति के बीच बड़ा अंतर बना रहेगा।एनसीआर के अन्य शहरों, जैसे गुरुग्राम और फरीदाबाद, में स्थिति और चुनौतीपूर्ण बताई जा रही है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक इन शहरों में सार्वजनिक चार्जिंग सुविधाएं बेहद सीमित हैं, जबकि अनुमानित जरूरत क्रमशः 20 और 26 प्वाइंट्स की है। इससे संकेत मिलता है कि पूरे क्षेत्र में EV इंफ्रास्ट्रक्चर समान रूप से विकसित नहीं हो पाया है।बैटरी-स्वैपिंग नेटवर्क भी अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंचा है। दिल्ली में जहां लगभग 1,606 स्वैपिंग स्टेशनों की आवश्यकता आंकी गई है, वहां फिलहाल 948 स्टेशन ही कार्यरत हैं। 2026 के अंत तक इस संख्या को 1,268 तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत बैटरी-स्वैपिंग व्यवस्था दोपहिया और तिपहिया EV उपयोगकर्ताओं के लिए विशेष रूप से लाभकारी हो सकती है।पर्यावरण और स्वच्छ परिवहन क्षेत्र के जानकारों का सुझाव है कि इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार के साथ नीतिगत सुधार भी जरूरी हैं। ‘राइट टू चार्ज’ जैसे प्रावधान लागू किए जाने की बात कही जा रही है, ताकि लोग अपनी निजी पार्किंग में चार्जर लगाने के अधिकार से वंचित न रहें। साथ ही नई आवासीय और व्यावसायिक इमारतों में EV-रेडी पार्किंग की व्यवस्था को अनिवार्य बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है।वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के अधिकारियों के अनुसार, दिल्ली और एनसीआर के शहरों द्वारा प्रस्तुत कार्य योजनाओं की नियमित समीक्षा की जाएगी, ताकि तय समयसीमा के भीतर लक्ष्यों को हासिल किया जा सके।तेजी से बढ़ती इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के बीच यह स्पष्ट है कि यदि चार्जिंग और स्वैपिंग ढांचे को समय रहते मजबूत नहीं किया गया, तो EV अपनाने की रफ्तार प्रभावित हो सकती है। आने वाले वर्ष इस दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।

