Sunday, March 15, 2026
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क्या अब बूंद बूंद तेल को तरसते वाली है दुनिया?

मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के बीच वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर चिंताएं तेज हो गई हैं। आशंका जताई जा रही है कि अगर हालात और बिगड़े तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन की भारी कमी पैदा हो सकती है। रिपोर्ट्स के अनुसार Iran अब तेल के प्रमुख समुद्री मार्गों को लेकर सख्त कदम उठाने पर विचार कर रहा है।खबरों के मुताबिक तेहरान की रणनीतिक बैठकों में यह संकेत दिया गया है कि यदि United States और Israel की ओर से हमले जारी रहते हैं, तो Bab-el-Mandeb Strait से गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही को रोका जा सकता है।

यह समुद्री रास्ता वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम माना जाता है।इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने कहा था कि ईरान से जुड़ा संघर्ष लगभग खत्म होने की स्थिति में है। हालांकि ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने इस बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी और कहा कि युद्ध कब समाप्त होगा, इसका फैसला तेहरान ही करेगा। उनका कहना था कि अगर हमले जारी रहे तो ईरान अपने क्षेत्र से तेल की सप्लाई रोक सकता है।

Bab-el-Mandeb Strait एक संकरा लेकिन रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, जो Red Sea को Gulf of Aden से जोड़ता है। यही रास्ता आगे Suez Canal के जरिए Mediterranean Sea और Indian Ocean को भी जोड़ता है। यह मार्ग Yemen और Djibouti के बीच स्थित है और वैश्विक समुद्री व्यापार के लिए बेहद अहम माना जाता है।इस बीच खाड़ी क्षेत्र का एक और प्रमुख समुद्री रास्ता Strait of Hormuz भी युद्ध के कारण लगभग ठप पड़ चुका है।

ईरान ने हालिया हमलों के बाद इस मार्ग को बंद करने का ऐलान किया था और कुछ जहाजों को निशाना बनाए जाने की भी खबरें सामने आई थीं।विशेषज्ञों के मुताबिक Strait of Hormuz से हर दिन करीब 1.5 करोड़ बैरल कच्चे तेल की आपूर्ति होती है, जो दुनिया की कुल तेल सप्लाई का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा है। ऐसे में इस मार्ग में रुकावट का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ रहा है।इस रास्ते से Saudi Arabia, Kuwait, Qatar, Bahrain, United Arab Emirates और Iran जैसे देश तेल और गैस का निर्यात करते हैं। लेकिन मौजूदा हालात के कारण Iraq, कुवैत और यूएई को अपने उत्पादन में कटौती करनी पड़ रही है।ऊर्जा की कीमतों में तेजी से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ने की आशंका है। अगर यह संकट लंबा खिंचता है तो महंगाई बढ़ सकती है और कई देशों में ईंधन की उपलब्धता भी प्रभावित हो सकती है।

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