Sunday, February 8, 2026
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कितनी ताकतवर और खतरनाक है भारत की अग्नि-3 मिसाइल?

भारत ने अपनी सामरिक ताकत को और मजबूत करते हुए अग्नि-3 बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया है। 6 फरवरी 2026 को ओडिशा के चांदीपुर स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज से इस मिसाइल को लॉन्च किया गया। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह परीक्षण पूरी तरह सफल रहा और सभी तकनीकी व ऑपरेशनल मानकों पर मिसाइल खरी उतरी।यह परीक्षण स्ट्रेटेजिक फोर्सेज कमांड की निगरानी में किया गया, जो भारत की परमाणु और सामरिक क्षमताओं की जिम्मेदारी संभालती है। इस सफलता के साथ भारत की रणनीतिक प्रतिरोधक क्षमता को और मजबूती मिली है।

क्या है अग्नि-3 मिसाइल की खासियत?

अग्नि-3 एक इंटरमीडिएट रेंज बैलिस्टिक मिसाइल है, जिसे परमाणु हथियार ले जाने के लिए डिजाइन किया गया है। यह भारत की अग्नि मिसाइल श्रृंखला का एक अहम हिस्सा मानी जाती है।रेंज: लगभग 3,000 से 5,000 किलोमीटर, स्पीड: मैक 15, यानी करीब 18,500 किमी प्रति घंटा, लंबाई: लगभग 17 मीटर, वजन: करीब 50 टन, इस रेंज के साथ अग्नि-3 भारत को पाकिस्तान के पूरे क्षेत्र और चीन के बड़े हिस्से तक मारक क्षमता देती है।पलक झपकते लक्ष्य तक पहुंचने की क्षमताअग्नि-3 की सबसे खतरनाक खासियत इसकी रफ्तार है। यह मिसाइल 5 से 6 किलोमीटर प्रति सेकेंड की गति से उड़ान भरती है, जिससे दुश्मन को प्रतिक्रिया देने का बेहद कम समय मिलता है। इसके हल्के डिजाइन के कारण भविष्य में इसकी रेंज को और बढ़ाया जाना भी संभव है।

एडवांस नेविगेशन सिस्टम

इस मिसाइल में रिंग लेजर जाइरोस्कोप आधारित इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम लगा है। इस तकनीक की मदद से मिसाइल बेहद सटीक निशाना साध सकती है और जरूरत पड़ने पर उड़ान के दौरान ही लक्ष्य में बदलाव भी कर सकती है। इसमें मल्टीपल टारगेट क्षमता वाली आधुनिक तकनीक का भी इस्तेमाल किया गया है।इसी बीच भारतीय सेना ने हवाई सुरक्षा और निगरानी को और मजबूत करने की दिशा में भी कदम उठाया है। सेना ने करीब 725 करोड़ रुपये की लागत से 30 लो-लेवल लाइटवेट रडार खरीदने के लिए टेंडर जारी किया है।ये रडार ड्रोन, कम ऊंचाई पर उड़ने वाले विमानों और छोटे व धीमे लक्ष्यों को पकड़ने में बेहद प्रभावी होंगे। मौजूदा समय में ड्रोन से बढ़ते खतरों को देखते हुए इसे एक अहम रणनीतिक फैसला माना जा रहा है।अग्नि-3 का सफल परीक्षण और नए रडार सिस्टम की खरीद यह साफ संकेत देती है कि भारत अपनी सीमाओं की सुरक्षा और रणनीतिक संतुलन को लेकर पूरी तरह सतर्क है। इन कदमों से न सिर्फ देश की रक्षा क्षमता मजबूत होगी, बल्कि किसी भी संभावित खतरे के खिलाफ भारत की तैयारी भी और पुख्ता होगी।

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