मणिपुर पिछले काफी समय से हिंसा और राजनीतिक अस्थिरता का सामना कर रहा था। अब राज्य को नया नेतृत्व मिलने जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी विधायक दल की बैठक में युमनाम खेमचंद सिंह को सर्वसम्मति से नेता चुना गया है, जिसके बाद उनका मुख्यमंत्री बनना तय माना जा रहा है।युमनाम खेमचंद सिंह मणिपुर की राजनीति का जाना-पहचाना चेहरा हैं। वे सिंगजामेई विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं और इससे पहले विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। विधायक दल का नेता चुना जाना इस बात का संकेत है कि पार्टी नेतृत्व उन्हें राज्य में स्थिरता लाने के लिए उपयुक्त मानता है।
विधायक के रूप में आय
साल 2020 में मणिपुर सरकार ने विधायकों के वेतन और भत्तों में संशोधन किया था। एक विधायक को मूल वेतन के साथ विभिन्न भत्ते मिलाकर लगभग ढाई लाख रुपये प्रतिमाह तक की राशि मिलती है। इसमें करीब 50,000 रुपये मूल वेतन, निर्वाचन क्षेत्र भत्ता, सचिवालय भत्ता और अन्य सुविधाएं शामिल होती हैं। टेलीफोन, मनोरंजन और अन्य मदों के तहत मिलने वाले भत्तों को जोड़ने पर कुल राशि लगभग 2.5 लाख रुपये प्रति माह तक पहुंच जाती है।
मुख्यमंत्री बनने पर वेतन
दिलचस्प बात यह है कि मुख्यमंत्री बनने के बाद प्रत्यक्ष मासिक वेतन कुछ कम हो सकता है। उपलब्ध आधिकारिक जानकारी और हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मणिपुर के मुख्यमंत्री को वेतन और भत्तों सहित लगभग 1.2 से 1.5 लाख रुपये प्रतिमाह मिलते हैं।वेतन से ज्यादा अहम हैं सुविधाएंहालांकि नकद वेतन अपेक्षाकृत कम दिखाई देता है, लेकिन मुख्यमंत्री पद के साथ कई विशेष सुविधाएं जुड़ी होती हैं। इनमें आधिकारिक सरकारी आवास, सुरक्षा (आमतौर पर उच्च स्तरीय), सरकारी वाहन, निजी स्टाफ, यात्रा भत्ता और व्यापक चिकित्सा सुविधाएं शामिल हैं। इसके अलावा प्रशासनिक और लॉजिस्टिक सपोर्ट भी उपलब्ध रहता है।मुख्यमंत्री पद की असली अहमियत आर्थिक लाभ में नहीं, बल्कि राजनीतिक और प्रशासनिक अधिकारों में होती है। इस पद पर रहते हुए राज्य की कार्यपालिका का नेतृत्व करना, नीतिगत फैसले लेना और कानून-व्यवस्था तथा विकास कार्यों की दिशा तय करना प्रमुख जिम्मेदारियां होती हैं। मणिपुर जैसे संवेदनशील राज्य में यह भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।

