संयुक्त राष्ट्र में भारत ने एक बार फिर पाकिस्तान पर तीखा हमला बोला और उसके आरोपों को खारिज किया। भारत की ओर से स्थायी प्रतिनिधि पर्वथनेनी हरीश ने कहा कि भारत का पड़ोसी देश अंतरराष्ट्रीय मंचों का इस्तेमाल अपने राजनीतिक हितों के लिए करता है और धार्मिक मुद्दों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करता है।
भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि भारत विविधता वाला देश है, जहां कई धर्मों के लोग सदियों से साथ रहते आए हैं। उन्होंने यह भी बताया कि हिंदू, बौद्ध, जैन और सिख जैसे प्रमुख धर्मों की उत्पत्ति भारत में हुई है, जिससे देश को धार्मिक सहिष्णुता की समझ और मजबूत बनती है।भारत ने संयुक्त राष्ट्र की भूमिका पर भी जोर देते हुए कहा कि इस मंच को किसी एक धर्म तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि सभी प्रकार के धार्मिक भेदभाव और असहिष्णुता के खिलाफ संतुलित दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।
इस संदर्भ में 1981 की उस घोषणा का उल्लेख किया गया, जिसमें धर्म या आस्था के आधार पर भेदभाव समाप्त करने की बात कही गई थी।भारत ने अप्रत्यक्ष रूप से पाकिस्तान पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ देश अपने क्षेत्र में “इस्लामोफोबिया” जैसे मुद्दों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करते हैं, जबकि उनके अपने यहां अल्पसंख्यकों के साथ गंभीर समस्याएं मौजूद हैं। उदाहरण के तौर पर अहमदिया समुदाय के साथ व्यवहार और अफगान नागरिकों की स्थिति का जिक्र किया गया।
इसके अलावा, भारत ने इस्लामिक सहयोग संगठन को लेकर भी चिंता जताई और कहा कि इस मंच का इस्तेमाल कुछ देशों द्वारा अपने पक्ष में माहौल बनाने के लिए किया जाता है। भारत के अनुसार, ऐसे मंचों से लगाए जाने वाले आरोप कई बार तथ्यों पर आधारित नहीं होते।अंत में भारत ने संयुक्त राष्ट्र से अपील की कि वह अपने संसाधनों का उपयोग ऐसे समाज के निर्माण में करे, जहां सभी धर्मों के लोगों के अधिकारों की समान रूप से रक्षा हो और किसी भी तरह के भेदभाव के लिए जगह न हो।

