हाल के दिनों में सोशल मीडिया और चर्चाओं में यह सवाल जोर पकड़ रहा है कि क्या दिल्ली में लोगों के लापता होने की घटनाएं बढ़ रही हैं। इन आशंकाओं के बीच दिल्ली पुलिस ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि घबराने की कोई जरूरत नहीं है, क्योंकि सामने आए आंकड़े पिछले वर्षों की तुलना में किसी बढ़ोतरी की ओर इशारा नहीं करते।दिल्ली पुलिस द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के मुताबिक, 1 से 15 जनवरी के बीच राजधानी में कुल 807 लोगों के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज की गई। इसका मतलब है कि औसतन रोज़ करीब 54 मामले सामने आए। इनमें 509 महिलाएं और लड़कियां, जबकि 298 पुरुष शामिल थे। लापता व्यक्तियों में 191 नाबालिग और 616 वयस्क बताए गए हैं।पुलिस का कहना है कि यदि इन आंकड़ों की तुलना पिछले सालों की इसी अवधि से की जाए, तो इस साल गुमशुदगी के मामलों में गिरावट देखी जा रही है। हालांकि, पूरे महीने के कुल मामलों की संख्या फिलहाल सार्वजनिक नहीं की गई है।
पुलिस की सफाई और कार्रवाई
दिल्ली पुलिस ने अपने बयान में दोहराया कि वह पारदर्शी और निष्पक्ष अपराध रिपोर्टिंग प्रणाली पर काम करती है। किसी भी व्यक्ति के लापता होने की सूचना मिलते ही मामला दर्ज किया जाता है और जांच तुरंत शुरू की जाती है। पुलिस के अनुसार, गुमशुदगी की शिकायतें, नजदीकी पुलिस थाने, ऑनलाइन पोर्टल, और 112 आपातकालीन सेवा के जरिए भी दर्ज कराई जा सकती हैं। सभी मामलों में मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) का सख्ती से पालन किया जाता है। खासतौर पर बच्चों से जुड़े मामलों को सबसे अधिक प्राथमिकता दी जाती है और उनकी तलाश के लिए तुरंत विशेष प्रयास शुरू किए जाते हैं।दिल्ली पुलिस का साफ कहना है कि लोगों के गायब होने को लेकर फैल रही आशंकाएं तथ्यात्मक नहीं हैं। मौजूदा आंकड़े यह संकेत देते हैं कि हालात नियंत्रण में हैं और पुलिस हर मामले में सक्रिय रूप से कार्रवाई कर रही है।

