तीन घंटे में साकार हुई संपूर्ण रामकथा, छऊ और कलरिपयट्टु के युद्ध दृश्यों ने दर्शकों को किया मंत्रमुग्ध
नई दिल्ली। भारतीय कला, संस्कृति और फोटो पत्रकारिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले पद्मश्री वीरेंद्र प्रभाकर की स्मृति में मंडी हाउस स्थित श्रीराम भारतीय कला केंद्र में ‘युग-युग की सत्य कथा’ संपूर्ण रामलीला का भव्य मंचन किया गया। चित्र कला संगम की ओर से आयोजित इस विशेष प्रस्तुति में श्रीराम भारतीय कला केंद्र के कलाकारों ने महज तीन घंटे में संपूर्ण रामकथा को मंच पर जीवंत कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
भगवान श्रीराम के आदर्शों, मर्यादा, त्याग और धर्म की विजय को केंद्र में रखकर प्रस्तुत इस रामलीला में भारतीय नृत्य परंपरा और पारंपरिक युद्ध कलाओं का अनूठा संगम देखने को मिला। मंच पर रामायण के प्रमुख प्रसंगों की प्रभावशाली प्रस्तुति ने दर्शकों को भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत से रूबरू कराया।
रामलीला के युद्ध दृश्यों में मयूरभंज छऊ और कलरिपयट्टु जैसी पारंपरिक कलाओं का आकर्षक समन्वय विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। कलाकारों के सधे हुए अभिनय, जीवंत भावाभिव्यक्ति, युद्ध कलाओं के कौशल और भव्य मंच सज्जा ने कथा के विभिन्न प्रसंगों को प्रभावशाली रूप से प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम के दौरान दर्शक दीर्घा खचाखच भरी रही। दर्शकों ने कलाकारों की प्रस्तुति और रामकथा के मंचन का भरपूर आनंद लिया। तीन घंटे में संपूर्ण रामकथा को प्रस्तुत करने वाली इस विशिष्ट रामलीला ने भारतीय रंगमंच, नृत्य और पारंपरिक कलाओं की समृद्ध परंपरा को एक मंच पर साकार किया।
यह आयोजन पद्मश्री वीरेंद्र प्रभाकर की स्मृति को समर्पित रहा। भारतीय कला, संस्कृति और फोटो पत्रकारिता के क्षेत्र में उनके योगदान को याद करते हुए इस विशेष प्रस्तुति के माध्यम से भारतीय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन का संदेश भी दिया गया।

