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नक्सलवाद का खतरा मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति, दृढ़ सुरक्षा नीति और विकासोन्मुखी शासन से समाप्त हुआ: सी.पी. राधाकृष्णन

रायपुर। उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने कहा कि छत्तीसगढ़ आज वामपंथी उग्रवाद के भय और अभाव के दौर से निकलकर शांति, प्रगति और नए अवसरों की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य में दशकों से चले आ रहे नक्सली खतरे को मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति, दृढ़ सुरक्षा नीति और विकासोन्मुखी शासन के माध्यम से समाप्त किया गया है।

उपराष्ट्रपति शुक्रवार को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), रायपुर के तीसरे दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने इस अवसर पर स्नातक छात्रों से देशवासियों के स्वास्थ्य, विश्वास और जीवन की रक्षा की जिम्मेदारी पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ निभाने का आह्वान किया।

डिग्री के साथ बड़ी जिम्मेदारी भी मिली: उपराष्ट्रपति

सी.पी. राधाकृष्णन ने कहा कि दीक्षांत समारोह केवल उत्सव का अवसर नहीं, बल्कि जिम्मेदारी संभालने का भी क्षण है। उन्होंने स्नातकों से कहा कि आज उन्हें डिग्रियां मिल रही हैं, लेकिन कल उन्हें इससे कहीं अधिक मूल्यवान जिम्मेदारी सौंपी जाएगी—देश की जनता के स्वास्थ्य, विश्वास और जीवन की रक्षा की।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2012 में स्थापना के बाद से एम्स रायपुर ने मध्य भारत में स्वास्थ्य सेवाओं, चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान से जुड़ी क्षेत्रीय असमानताओं को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। कम समय में यह संस्थान छत्तीसगढ़ और पड़ोसी राज्यों के लिए प्रमुख तृतीयक स्वास्थ्य सेवा केंद्र के रूप में स्थापित हुआ है। साथ ही ग्रामीण और आदिवासी समुदायों तक गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाएं पहुंचाने में भी योगदान दे रहा है।

नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में बदली तस्वीर

छत्तीसगढ़ में लंबे समय तक चली चुनौतियों का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों, कमजोर परिवहन सुविधाओं और वामपंथी उग्रवाद ने राज्य के विकास में गंभीर बाधाएं खड़ी की थीं।

उन्होंने कहा कि कई दूरस्थ और आदिवासी इलाकों में भय और हिंसा के कारण सड़क, स्कूल और अस्पताल जैसी बुनियादी सुविधाओं का विकास प्रभावित हुआ। इससे लोगों को आवश्यक सेवाओं तक पहुंचने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि छत्तीसगढ़ अब अपने अतीत की चुनौतियों से निकलकर समृद्धि, विकास और प्रगति के नए दौर की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने इस परिवर्तन का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के रणनीतिक संकल्प और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व को दिया।

उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों की पहचान कभी हिंसा से होती थी, वे अब सड़क, स्कूल, अस्पताल, बेहतर कनेक्टिविटी, निवेश और रोजगार के अवसरों के लिए पहचाने जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि यह बदलाव दिखाता है कि मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति, प्रभावी सुरक्षा नीति और विकासोन्मुखी शासन मिलकर व्यापक परिवर्तन ला सकते हैं।

एम्स रायपुर नए छत्तीसगढ़ की पहचान

उपराष्ट्रपति ने एम्स रायपुर को नए छत्तीसगढ़ के प्रमुख प्रतीकों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि यह संस्थान उस परिवर्तन को दर्शाता है, जिसमें राज्य भय और अभाव के दौर से निकलकर शांति, प्रगति और संभावनाओं के नए युग में प्रवेश कर रहा है।

उन्होंने संस्थान की उन्नत स्वास्थ्य सेवाओं और प्रत्यारोपण के क्षेत्र में उपलब्धियों की भी सराहना की। उन्होंने छत्तीसगढ़ में हुए पहले किडनी प्रत्यारोपण, किडनी प्रत्यारोपण में 95 प्रतिशत से अधिक सफलता दर, कॉर्नियल प्रत्यारोपण और कान प्रत्यारोपण जैसी उपलब्धियों का उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि हृदय प्रत्यारोपण कार्यक्रम की मंजूरी भी संस्थान के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

हर राज्य, जिले और गांव का विकास जरूरी

‘विकसित भारत’ के राष्ट्रीय लक्ष्य का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि संतुलित विकास के बिना यह लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सकता। विकसित भारत तभी संभव है, जब हर राज्य, जिला और गांव विकास की मुख्यधारा से जुड़े।

उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा तक व्यापक पहुंच विकसित भारत की परिकल्पना की बुनियाद है। इस दौरान उन्होंने पिछले 12 वर्षों में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में हुए विस्तार का भी उल्लेख किया।

उन्होंने उच्च शिक्षा में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उनके अनुसार, वर्ष 2014-15 में उच्च शिक्षा में महिला नामांकन 1.57 करोड़ था, जो 2023-24 में बढ़कर 2.24 करोड़ हो गया। यह 42.2 प्रतिशत की वृद्धि है।

एम्स रायपुर के इस दीक्षांत समारोह में भी 376 महिला और 313 पुरुष स्नातकों को डिग्री प्रदान की गई।

युवाओं से नशे को ‘न’ कहने का आह्वान

उपराष्ट्रपति ने युवा स्नातकों से हमेशा नशीली दवाओं को ‘न’ कहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि युवाओं को ऐसे भारत के निर्माण में योगदान देना चाहिए, जहां तकनीक का लाभ हर नागरिक तक पहुंचे और प्रत्येक युवा बेहतर भविष्य का सपना देख सके।

उन्होंने स्नातकों से कहा, “आपका ज्ञान स्वास्थ्य प्रदान करे, आपका शोध नवाचार लाए और आपकी सेवा प्रेरणा दे।”

उन्होंने एम्स रायपुर को नैदानिक उत्कृष्टता, वैज्ञानिक नवाचार, जन स्वास्थ्य और करुणापूर्ण सेवा के क्षेत्र में निरंतर सफलता की शुभकामनाएं दीं। साथ ही उम्मीद जताई कि छत्तीसगढ़ का परिवर्तन वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण की यात्रा में महत्वपूर्ण अध्याय बनेगा।

समारोह में उपराष्ट्रपति ने मेधावी छात्रों को स्वर्ण पदक और प्रमाण पत्र भी प्रदान किए।

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका, केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल, छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, रायपुर के सांसद बृजमोहन अग्रवाल, एम्स रायपुर के अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) संजीव हांडा और कार्यकारी निदेशक सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल अशोक जिंदल सहित अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।

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