नई दिल्ली: किसानों को मौसम और कृषि से जुड़ी उपयोगी जानकारी समय पर उपलब्ध कराने की दिशा में राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (NABARD) और भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन यानी MoU पर हस्ताक्षर किए हैं।
इस समझौते के तहत IMD के कृषि-मौसम संबंधी डेटा और सेवाओं को DiCRA (Data in Climate Resilient Agriculture) डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाएगा। यह एक ओपन-सोर्स डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसे UNDP और NABARD का सहयोग प्राप्त है।
इस पहल का मुख्य उद्देश्य देशभर के किसानों, वित्तीय संस्थानों, नीति निर्माताओं और शोधकर्ताओं को मौसम से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी मुफ्त में उपलब्ध कराना है।
MoU के तहत IMD, DiCRA के जरिए जिला और ब्लॉक स्तर के मौसम पूर्वानुमान, कृषि-मौसम सलाह, वास्तविक समय के मौसम अवलोकन और मौसम संबंधी अलर्ट उपलब्ध कराएगा।
इन जानकारियों को DiCRA के एक विशेष Weather Portal में शामिल किया जाएगा। इसके साथ मिट्टी में नमी, वनस्पति की स्थिति, फसल की स्थिति और जलवायु जोखिम से जुड़े जियोस्पेशियल डेटा को भी जोड़ा जाएगा। इससे किसानों और अन्य उपयोगकर्ताओं को ब्लॉक और जिला स्तर पर निर्णय लेने योग्य जानकारी मिल सकेगी।
NABARD के चेयरमैन डॉ. शाजी कृष्णन वी. ने कहा कि जलवायु जोखिम को केवल एक अलग मुद्दे के तौर पर नहीं देखा जा सकता, बल्कि इसे विकास और वित्तीय फैसलों का हिस्सा बनाना होगा। उन्होंने कहा कि मौसम संबंधी जानकारी को समय पर कार्रवाई में बदलना जरूरी है।
वहीं, IMD के महानिदेशक डॉ. मृत्युंजय महापात्र ने बताया कि पिछले एक दशक में भारत की मौसम पूर्वानुमान क्षमता में करीब 40 से 50 प्रतिशत तक सुधार हुआ है और अब पूर्वानुमान पंचायत स्तर तक पहुंच रहे हैं। अगली चुनौती इस जानकारी को हर किसान तक सही समय और उपयोगी प्रारूप में पहुंचाना है।
NABARD, DiCRA के ओपन APIs और डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर के जरिए IMD की कृषि-मौसम सेवाओं को किसानों और अन्य हितधारकों तक पहुंचाएगा।
इसके माध्यम से जिला स्तरीय कृषि सलाह, मौसमी जोखिम अलर्ट और मौसम आधारित संवेदनशीलता आकलन किसानों, शोधकर्ताओं, नीति निर्माताओं, बैंक अधिकारियों और फील्ड स्टाफ के लिए उपलब्ध होंगे।
यह साझेदारी मौसम संबंधी वैज्ञानिक जानकारी को किसानों के लिए समय पर और उपयोगी फैसलों में बदलने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।

