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RSVC-AMRIT प्लेटफॉर्म का शुभारंभ, ग्रामीण समुदायों को नवाचार से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

नई दिल्ली: भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार कार्यालय (OPSA) के सहयोग से नाबार्ड (NABARD) द्वारा ग्रामीण नवाचार और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण को मजबूत करने के लिए विकसित RSVC-AMRIT प्लेटफॉर्म का शुभारंभ किया गया। AMRIT (Accelerated Medium for Rural Innovations and Technologies) एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसे RuTAGe Smart Village Centre (RSVC) इकोसिस्टम को मजबूत करने और तकनीक आधारित ग्रामीण विकास को गति देने के लिए तैयार किया गया है।

इस पोर्टल का शुभारंभ 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. अजय कुमार सूद ने किया। इस अवसर पर नाबार्ड के अध्यक्ष डॉ. शाजी कृष्णन वी. सहित विभिन्न संगठनों और संबंधित क्षेत्रों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

प्रो. अजय कुमार सूद ने RSVC-AMRIT प्लेटफॉर्म के शुभारंभ को भारत के नवाचार तंत्र और ग्रामीण समुदायों की जरूरतों के बीच की दूरी कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि देश के पास मजबूत वैज्ञानिक और तकनीकी क्षमताएं हैं, लेकिन वास्तविक चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि इन नवाचारों का लाभ बड़े पैमाने पर किसानों, ग्रामीण उद्यमियों और ग्रामीण परिवारों तक पहुंचे।

उन्होंने कहा कि RuTAGe Smart Village Centres नाबार्ड के व्यापक ग्रामीण नेटवर्क के माध्यम से प्रमाणित तकनीकों और स्टार्टअप समाधानों को अंतिम छोर तक पहुंचाने के लिए एक व्यवस्थित तंत्र उपलब्ध कराते हैं।

प्रो. सूद ने तकनीक आधारित ग्रामीण उद्यमिता पर जोर देते हुए कहा कि AMRIT प्लेटफॉर्म RSVC इकोसिस्टम की डिजिटल रीढ़ के रूप में काम करेगा। इसके माध्यम से तकनीकों के प्रसार, सहयोग, निगरानी, प्रभाव के आकलन और ग्रामीण समुदायों से फीडबैक लेने की सुविधा मिलेगी। उन्होंने विश्वास जताया कि यह पहल ग्रामीण नवाचार को मजबूत करने, आजीविका के नए अवसर पैदा करने और समावेशी एवं टिकाऊ ग्रामीण परिवर्तन को गति देने में मदद करेगी।

ग्रामीण जरूरतों और तकनीक के बीच की दूरी कम करना जरूरी : नाबार्ड अध्यक्ष

नाबार्ड के अध्यक्ष डॉ. शाजी कृष्णन वी. ने कहा कि भारत के सामने मुख्य चुनौती नवाचारों की कमी नहीं, बल्कि ग्रामीण जरूरतों, तकनीकों, उनके सत्यापन की व्यवस्था, क्रियान्वयन एजेंसियों और वित्त के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की है।

उन्होंने AMRIT प्लेटफॉर्म को ग्रामीण क्षेत्रों में तकनीकों को तेजी से और अधिक पारदर्शी तरीके से अपनाने में सक्षम बनाने वाला महत्वपूर्ण माध्यम बताया। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की परिवर्तनकारी क्षमता पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि यह प्लेटफॉर्म ग्रामीण समुदायों को उनके लिए उपयुक्त और प्रमाणित तकनीकी समाधानों की पहचान करने में मदद करेगा और सूचना के असंतुलन को कम करेगा।

डॉ. शाजी कृष्णन ने नाबार्ड और प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार कार्यालय के बीच साझेदारी को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि शोध संस्थानों, नवोन्मेषकों, स्टार्टअप, सरकारी एजेंसियों, वित्तीय संस्थानों और सामुदायिक संगठनों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि AMRIT और RSVC की सफलता का आकलन केवल प्लेटफॉर्म के निर्माण से नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर तकनीकों को अपनाने, आजीविका में सुधार, उत्पादकता में वृद्धि और किसानों, महिलाओं, युवाओं तथा ग्रामीण उद्यमियों तक पहुंचने वाले वास्तविक लाभों से किया जाना चाहिए। यह पहल विकसित भारत@2047 के लक्ष्य में भी योगदान देगी।

गांवों में स्थानीय तकनीकी केंद्रों के जरिए पहुंचेंगी उपयोगी तकनीकें

RuTAGe Smart Village Centre (RSVC) पहल के तहत शोध संस्थानों, नवोन्मेषकों और स्टार्टअप द्वारा विकसित उपयुक्त एवं किफायती तकनीकों को गांव स्तर पर स्थापित स्थानीय तकनीकी केंद्रों के माध्यम से ग्रामीण समुदायों तक पहुंचाया जा रहा है।

इस पहल के अंतर्गत कृषि, ग्रामीण उद्यम, नवीकरणीय ऊर्जा, शिक्षा, सहायक तकनीक, जल एवं स्वच्छता तथा नागरिक सेवाओं से जुड़ी तकनीकों को बढ़ावा दिया जा रहा है।

OPSA और NABFOUNDATION के साथ नाबार्ड की साझेदारी

इससे पहले नाबार्ड ने प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार कार्यालय (OPSA) और नाबार्ड की सहायक संस्था NABFOUNDATION के साथ त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन (MoU) किया था। इसके तहत RSVC के लिए राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र (National Centre of Excellence) स्थापित किया गया है।

नाबार्ड स्वयं की सहायता के साथ-साथ विभिन्न कॉरपोरेट संस्थानों के कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) सहयोग से भी RSVC स्थापित करेगा। वहीं, CSR के माध्यम से समर्थित RSVC परियोजनाओं के क्रियान्वयन में NABFOUNDATION प्रमुख भागीदार की भूमिका निभाएगा।

RSVC-AMRIT प्लेटफॉर्म के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में वैज्ञानिक नवाचार और आधुनिक तकनीकों की पहुंच बढ़ने की उम्मीद है। इससे किसानों और ग्रामीण उद्यमियों को उनकी जरूरत के अनुरूप प्रमाणित तकनीक उपलब्ध कराने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नवाचार, रोजगार और आजीविका के नए अवसरों को बढ़ावा मिल सकता है।

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