1,900 किलोमीटर की यात्रा में सैनिकों, वीर नारियों, शहीद परिवारों और नागरिक राइडर्स ने लिया हिस्सा, राष्ट्रीय युद्ध स्मारक से द्रास तक पहुंची पवित्र मिट्टी
द्रास। कारगिल विजय दिवस के अवसर पर भारतीय सेना और जावा-येज़्दी मोटरसाइकिल्स की संयुक्त पहल ‘शौर्य विजय यात्रा’ का समापन सोमवार को द्रास स्थित कारगिल युद्ध स्मारक पर हुआ। करीब 1,900 किलोमीटर लंबी इस विशेष यात्रा का उद्देश्य 1999 के कारगिल युद्ध के वीर सैनिकों के अदम्य साहस, बलिदान और राष्ट्रसेवा की भावना को श्रद्धांजलि देना था।
नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय युद्ध स्मारक से शुरू हुई इस यात्रा में सेवारत और सेवानिवृत्त रक्षा कर्मियों, वीर नारियों, शहीदों के परिजनों तथा नागरिक राइडर्स ने भाग लिया। इस अभियान ने सेना और समाज के बीच जुड़ाव को मजबूत करते हुए देशवासियों को सेवा, समर्पण और राष्ट्रभक्ति के मूल्यों से जोड़ने का संदेश दिया।
राष्ट्रीय युद्ध स्मारक की पवित्र मिट्टी पहुंची कारगिल युद्ध स्मारक
इस अभियान का सबसे भावनात्मक और प्रतीकात्मक क्षण राष्ट्रीय युद्ध स्मारक से लाई गई पवित्र मिट्टी को द्रास स्थित कारगिल युद्ध स्मारक तक पहुंचाना रहा। यह पहल उन वीर सैनिकों की पीढ़ियों के प्रति सम्मान का प्रतीक बनी, जिन्होंने देश की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया।
प्रमुख सैन्य स्मारकों पर दी गई श्रद्धांजलि
यात्रा हिमाचल प्रदेश और लद्दाख के दुर्गम पर्वतीय मार्गों से होकर गुजरी। इस दौरान प्रतिभागियों ने चंडीमंदिर, रेजांग ला और लेह युद्ध स्मारक सहित कई प्रमुख सैन्य स्थलों पर पहुंचकर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। द्रास पहुंचने के साथ यात्रा का समापन कारगिल युद्ध स्मारक पर हुआ।
2021 से जारी है शौर्य विजय यात्रा का अभियान
वर्ष 2021 में शुरू हुई इस पहल की परिकल्पना जावा-येज़्दी मोटरसाइकिल्स ने भारतीय सैनिकों की वीरगाथाओं को आम जनता तक पहुंचाने के उद्देश्य से की थी। समय के साथ यह अभियान एक ऐसे नागरिक-सैन्य आंदोलन के रूप में विकसित हुआ है, जिसमें राइडिंग समुदाय, सेवारत सैनिक, पूर्व सैनिक, वीर नारियां और शहीदों के परिवार एक मंच पर आकर देशभक्ति और कर्तव्य की भावना को नई पीढ़ी तक पहुंचा रहे हैं।
रक्षा मंत्री ने दिखाई थी हरी झंडी
इस वर्ष की शौर्य विजय यात्रा को केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। अभियान में वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों, पूर्व सैनिकों और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े आमंत्रित अतिथियों ने भी भाग लिया, जिससे इसकी राष्ट्रीय महत्ता और व्यापक जनभागीदारी को बल मिला।
कठिन पहाड़ी रास्तों पर दिखी मोटरसाइकिलों की क्षमता
यह पूरी यात्रा जावा और येज़्दी मोटरसाइकिलों के विभिन्न मॉडलों—जावा 350, जावा 42, जावा 42 एफजे, येज़्दी एडवेंचर और येज़्दी स्क्रैम्बलर—पर पूरी की गई। ऊंचे पर्वतीय दर्रों, चुनौतीपूर्ण रास्तों और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बीच इन मोटरसाइकिलों ने प्रतिभागियों को सुरक्षित और सफलतापूर्वक यात्रा पूरी करने में सहयोग दिया।
‘वीर सपूतों की गाथा आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना हमारा संकल्प’
क्लासिक लेजेंड्स के सह-संस्थापक अनुपम थरेजा ने कहा कि ‘शौर्य विजय यात्रा’ का उद्देश्य भारत के वीर सैनिकों की प्रेरणादायी गाथाओं को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय युद्ध स्मारक से द्रास तक का प्रत्येक किलोमीटर उन वीरों को समर्पित था, जिन्होंने राष्ट्र की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। उन्होंने भारतीय सेना, पूर्व सैनिकों, वीर नारियों, शहीद परिवारों और राइडिंग समुदाय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह पहल साहस, सेवा और राष्ट्रीय गौरव के मूल्यों को आने वाले वर्षों तक जीवित रखेगी।

