मध्य-पूर्व में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा संकट लगातार गहराता जा रहा है। कच्चे तेल की आपूर्ति और कीमतों को लेकर बनी अनिश्चितता के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने और ईंधन बचाने की अपील की है। राजधानी दिल्ली में इस अपील का असर अब साफ तौर पर दिखाई देने लगा है। पेट्रोल पंपों पर भीड़ पहले की तुलना में कम नजर आ रही है और लोग निजी वाहनों के बजाय सार्वजनिक परिवहन, कारपूलिंग और अन्य विकल्पों पर विचार कर रहे हैं।
पेट्रोल पंपों पर घटी भीड़, लोगों ने बदली आदतें ,दिल्ली के जनपथ, कनॉट प्लेस और मध्य दिल्ली जैसे व्यस्त इलाकों में पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारों में कमी दर्ज की गई है। कई लोगों ने अनावश्यक यात्राओं को कम करना शुरू कर दिया है। नागरिकों का कहना है कि संकट के समय ऊर्जा बचत केवल व्यक्तिगत फैसला नहीं बल्कि राष्ट्रीय जिम्मेदारी भी है। लोगों का मानना है कि यदि देशभर में ईंधन की खपत नियंत्रित होती है, तो इससे विदेशी मुद्रा भंडार और ऊर्जा सुरक्षा दोनों को मजबूती मिलेगी।
राजधानी में ट्रैफिक जाम और प्रदूषण लंबे समय से बड़ी समस्या बने हुए हैं। ऐसे में ऊर्जा संकट ने निजी वाहनों के अत्यधिक उपयोग पर नई बहस छेड़ दी है। कई नागरिकों का कहना है कि लोग जरूरत से ज्यादा गाड़ियों का इस्तेमाल केवल सुविधा और स्टेटस सिंबल के लिए करते हैं, जिससे ईंधन की खपत बढ़ती है। विशेषज्ञों का मानना है कि कारपूलिंग और सार्वजनिक परिवहन को अपनाने से न केवल पेट्रोल-डीजल की बचत होगी, बल्कि ट्रैफिक और प्रदूषण में भी कमी आएगी।
दिल्ली के कामकाजी वर्ग का कहना है कि केवल अपील से स्थिति पूरी तरह नियंत्रित नहीं होगी। लोगों ने सरकार से ‘वर्क फ्रॉम होम’ को बढ़ावा देने की मांग की है ताकि रोजाना लाखों वाहनों का दबाव सड़कों पर कम हो सके। इसके अलावा, कई नागरिकों ने ‘ऑड-ईवन’ नियम को दोबारा लागू करने की जरूरत बताई है।
कुछ लोगों का यह भी कहना है कि यदि सरकार सार्वजनिक परिवहन को और अधिक सस्ता, सुरक्षित और सुविधाजनक बनाए, तो लोग स्वाभाविक रूप से निजी वाहनों का उपयोग कम कर देंगे। दिल्ली मेट्रो और बस सेवाओं के विस्तार को भी समाधान के रूप में देखा जा रहा है।
मध्य-पूर्व में जारी तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर लगातार पड़ रहा है। लोगों के बीच यह डर बढ़ रहा है कि यदि हालात लंबे समय तक बने रहे, तो पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बड़ा उछाल आ सकता है। आम नागरिकों का कहना है कि महंगाई खुद ही लोगों को खपत कम करने पर मजबूर कर देती है, लेकिन केवल कीमतें बढ़ाना समाधान नहीं हो सकता।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऊर्जा संकट से निपटने के लिए सरकार और जनता दोनों को मिलकर काम करना होगा। एक तरफ लोगों को ईंधन बचाने की आदत अपनानी होगी, वहीं दूसरी ओर सरकार को सार्वजनिक परिवहन, वैकल्पिक ऊर्जा और यातायात प्रबंधन पर तेज़ी से काम करना पड़ेगा।

