मध्य-पूर्व में सैन्य तनाव उस समय और बढ़ गया जब अमेरिका और इज़रायल ने ईरान के खिलाफ बड़े पैमाने पर कार्रवाई की। अमेरिका ने अपने अभियान को “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” नाम दिया, जबकि इज़रायल ने इसे “लायन्स रोर” कहा।अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने इसे ईरान के खिलाफ निर्णायक कदम बताया। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार हमलों के दौरान ईरान के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei के कार्यालय के आसपास के क्षेत्रों को भी निशाना बनाए जाने की खबरें सामने आईं, हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
जवाबी कार्रवाई का दावा
हमलों के बाद ईरान ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उसने क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी और इज़रायली ठिकानों को निशाना बनाया है। ईरानी सेना और Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) ने कथित तौर पर मिसाइल और ड्रोन के जरिए जवाबी हमले किए।रिपोर्टों के मुताबिक कतर, बहरीन, जॉर्डन, इराक और संयुक्त अरब अमीरात के कुछ हिस्सों में विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं। हालांकि विभिन्न देशों की ओर से सुरक्षा कारणों से आधिकारिक विवरण सीमित रखा गया है।इज़रायल में भी एहतियातन सायरन बजाए गए और नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के निर्देश दिए गए। हाल के गाज़ा तनाव के बाद यह घटनाक्रम क्षेत्र में एक नई अस्थिरता लेकर आया है।
“किन देशों को बनाया निशाना?”
ईरान ने औपचारिक रूप से यह कहा है कि उसका लक्ष्य अमेरिकी और इज़रायली सैन्य ठिकाने और संपत्तियां हैं। हालांकि जवाबी कार्रवाई के दावों के बीच जिन देशों में सुरक्षा अलर्ट या धमाकों की खबरें सामने आईं, उनमें शामिल हैं:कतरबहरीनजॉर्डनइराकसंयुक्त अरब अमीरात (अबू धाबी और दुबई सहित)इन देशों में अमेरिकी सैन्य अड्डों या रणनीतिक ठिकानों की मौजूदगी को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हैं। अभी तक व्यापक नागरिक नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है।
हवाई सेवाओं पर असर
क्षेत्र में बढ़ते खतरे को देखते हुए कई एयरलाइनों ने अपनी उड़ानें अस्थायी रूप से निलंबित कर दी हैं। Air India ने सुरक्षा कारणों से मध्य-पूर्व के लिए उड़ानें रद्द करने की घोषणा की है।इसी तरह Turkish Airlines ने भी 2 मार्च तक अपनी कुछ सेवाएं स्थगित कर दी हैं। खाड़ी क्षेत्र और सीरिया ने अस्थायी रूप से अपने हवाई क्षेत्र को बंद करने का कदम उठाया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को रूट बदलना पड़ रहा है।
वैश्विक असर की आशंका
विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह टकराव लंबा खिंचता है, तो वैश्विक तेल आपूर्ति, समुद्री व्यापार मार्गों और कूटनीतिक समीकरणों पर गहरा असर पड़ सकता है। कई देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने संयम बरतने और तत्काल युद्धविराम की अपील की है।फिलहाल स्थिति तेजी से बदल रही है और दोनों पक्षों की ओर से लगातार बयान और सैन्य गतिविधियों की खबरें आ रही हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर इस पूरे घटनाक्रम पर टिकी हुई है।

