हाल ही में नेपाल के नए नोट में भारत के कई इलाकों को शामिल किया गया है! आज हम आपको इन्हीं इलाकों के बारे में जानकारी देने वाले हैं! साथ ही साथ आपको यह भी बताएंगे कि अब नेपाल ने इस नोट के बाद उत्पन्न हुए विवाद के ऊपर चुप्पी तोड़ दी है! हमारे देश भारत और नेपाल के बीच सीमा पर विवाद का मुद्दा एक बार फिर से गरमा गया है। आपको बता दे कि नेपाल सरकार ने अपने 100 रुपये के नए नोट में विवादित नक्शे को छापने का फैसला किया जिसमें भारतीय इलाकों कालापानी, लिपुलेख और लिंपियाधुरा को नेपाल का इलाका दिखाया गया है। इस विवादित नक्शे को चीन के इशारे पर नाचने वाले केपी ओली ने नेपाली संसद से पारित कराया था। नेपाल सरकार के इस ताजा फैसले पर भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सख्त रुख अपनाया है। भारतीय चाणक्य के बयान के बाद नेपाल के विदेश मंत्री नारायण काजी श्रेष्ठ ने कहा है कि नेपाल सीमा विवाद को राजनयिक माध्यम से सुलझाने के पक्ष में है और देश के साथ बैठकर बातचीत करना चाहता है। कालापानी, लिपुलेख और लिंपियाधुरा हमारे देश भारत के इलाके हैं और जानकारी के लिए बता दे कि नेपाल इस पर अपना दावा करता है। नारायण काजी श्रेष्ठ ने संसदीय कमिटी के सामने सोमवार को नेपाल सरकार के विवादित नक्शे के साथ 100 रुपये के नए नोट छापने के फैसले पर कुछ नहीं कहा। उन्होंने कहा, ‘हम भारत के साथ सीमा विवाद को सुलझाना चाहते हैं। हम इसे राजनयिक तरीके से सुलझाना चाहते हैं और बैठकर बातचीत करना चाहते हैं। हम इसके लिए कदम उठा रहे हैं।’ भारत ने नेपाल के नए नक्शे का शुरू से ही कड़ा विरोध किया है। ताजा घटनाक्रम पर भारतीय विदेश मंत्री ने शनिवार को कहा था कि नेपाल के ताजा कदम से हालात या जमीनी वास्तविकता नहीं बदलने जा रही है।
जयशंकर ने कहा, ‘हमारी स्थिति साफ है। नेपाल के साथ हमारी सीमा विवाद को लेकर बातचीत चल रही है। इन सबके बीच नेपाल ने एकतरफा तरीके से अपनी तरफ कुछ कदम उठाए हैं।’ नेपाल ने ओली के पीएम रहने के दौरान साल 2020 में यह विवादित नक्शा जारी किया था। बता दे कि इसमें भारतीय इलाकों को अपना दिखाया गया था जिसे भारत ने उसी समय खारिज कर दिया था। भारत ने कहा था कि यह एकतरफा कदम ऐतिहासिक तथ्यों या सबूतों पर आधारित नहीं है। भारत इसे स्वीकार नहीं करता है। वहीं नेपाल के वित्त और विदेश मंत्रालय के सूत्रों ने कहा है कि उन्हें इसका अंदाजा ही नहीं है कि कौन विवादित नक्शे के साथ 100 रुपये के नए नोट जारी करने का आइडिया कैबिनेट में लेकर आया है।
नेपाली विदेश और वित्त मंत्रालय के सूत्रों ने कहा, ‘इस फैसले से पहले पर्याप्त चर्चा और विचार विमर्श नहीं हुआ है। भारत को केवल यही परेशान कर रहा है जबकि हम केवल 100 रुपये के पुराने नोट की जगह पर नया नोट ला रहे हैं। इसका समय महत्वपूर्ण है, यह कदम तब उठाया गया है जब भारत में चुनाव हो रहे हैं और हम कह रहे हैं कि इसे बातचीत के जरिए सुलझाएंगे।’ वहीं नेपाली विदेश मंत्री ने आंखें दिखाते हुए कहा है कि नेपाल को कालापानी, लिपुलेख और लिंपियाधुरा पर संप्रभु अधिकारों का इस्तेमाल करना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘हमें संप्रभु अधिकारों और क्षेत्रीय अखंडता का लाभ उठाना चाहिए। यह सभी जानते हैं कि भारत और नेपाल के बीच कालापानी के इलाके को लेकर सीमा विवाद है।’ यहीं नहीं बता दे कि नेपाल ने हाल ही में जारी नए नोट में विवादित नक्शे का इस्तेमाल किया है। इसमें कई भारतीय क्षेत्रों को नेपाल में दिखाया गया है। ऐसा लगता है कि राजनीतिक अवसरवादिता के लिए ये फैसला बिना किसी विमर्श के जल्जदीबाजी में लिया गया। विवादित नक्शे के साथ करेंसी नोट जारी करने की घोषणा के कुछ दिनों बाद नेपाल का कहना है कि वह भारत के साथ सीमा मुद्दे को बातचीत के जरिए सुलझाना चाहता है। नेपाल के डिप्टी पीएम और विदेश मंत्री नारायण काजी श्रेष्ठ ने कहा है कि काठमांडू राजनयिक माध्यमों से विवाद को सुलझाने के पक्ष में है।
श्रेष्ठ ने सोमवार को काठमांडू में कहा, ‘हम भारत के साथ सीमा मुद्दे को सुलझाना चाहते हैं। हम चाहते हैं कि कूटनीतिक माध्यमों और बातचीत के माध्यम से चीजें ठीक हों। हम इसके लिए पहल भी कर रहे हैं।’ इससे पहले शनिवार को बारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने नेपाल को सख्त जवाब देते हुए कहा था कि हमारी स्थिति बहुत स्पष्ट है। आपको जानकारी देना चाहेंगे कि नेपाल के इस कदम से जमीनी हकीकत नहीं बदलेगी। नेपाल के साथ हम एक स्थापित मंच के माध्यम से अपनी सीमा मामलों पर चर्चा कर रहे हैं लेकिन इस बीच उन्होंने कुछ एकतरफा कदम उठाए हैं।

